अयोध्या। राम मंदिर भूमि खरीद प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी ) अब वर्ष 2021 में हुए चर्चित भूमि सौदों की भी गहन जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार जांच का दायरा केवल दान और चढ़ावे तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर निर्माण से जुड़े जमीन खरीद-फरोख्त के मामलों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जांच के दौरान रवि मोहन तिवारी उर्फ चिंटू तिवारी का नाम एक बार फिर चर्चा में आया है। आरोप है कि मंदिर निर्माण के दौरान हुए कुछ विवादित भूमि सौदों में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। आरोप लगाने वाले पक्ष का दावा है कि जमीन खरीद-बिक्री के लिए एक सिंडिकेट की तरह काम किया गया, जिसमें कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही।
मामले में सुल्तान अंसारी और हरीश पाठक के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ किसानों से कम कीमत पर जमीन खरीदने के बाद उसे बेहद कम समय में कई गुना अधिक मूल्य पर आगे बेचा गया। विपक्ष और सामाजिक संगठनों का दावा है कि एक किसान से लगभग दो करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन को कुछ ही समय बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को करीब 18 करोड़ रुपये में बेच दिया गया था।
विवाद का सबसे चर्चित पहलू यह रहा कि कथित तौर पर जमीन की खरीद और ट्रस्ट को बिक्री के बीच महज 15 मिनट का अंतर था। इसी तथ्य को आधार बनाकर उस समय भी कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने गंभीर सवाल उठाए थे तथा स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
हालांकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुका है। ट्रस्ट का कहना रहा है कि सभी भूमि खरीद नियमानुसार और बाजार मूल्य के अनुरूप की गई थीं तथा किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई।
अब एसआईटी की जांच के बाद इस पूरे मामले में नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसियां भूमि सौदों से जुड़े दस्तावेजों, रजिस्ट्री अभिलेखों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का परीक्षण कर रही हैं। फिलहाल जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।


