संस्कार भारती प्रतिष्ठान व अभियान, मुंबई के आयोजन में उमड़ी लोक संस्कृति की छटा, सावन की संध्या बनी यादगार
मुंबई/वसई। संस्कार भारती प्रतिष्ठान एवं अभियान, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में 7 अगस्त 2026 को वसई ईस्ट स्थित रीजेंसी बैंक्वेट्स में ‘कजरी महोत्सव-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। सावन की फुहारों के बीच आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में अयोध्या की सुप्रसिद्ध लोक गायिका सुश्री संजोली पाण्डेय ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाराष्ट्र सरकार के पूर्व राज्य मंत्री एवं भाजपा मुंबई के उपाध्यक्ष तथा अभियान के अध्यक्ष श्री अमरजीत मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय लोक संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक पर्वों के संरक्षण में संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
‘सावन की रिमझिम में लोकगीतों की बहार’ थीम पर आयोजित इस महोत्सव में अयोध्या से आईं लोक गायिका सुश्री संजोली पाण्डेय ने पारंपरिक एवं शास्त्रीय कजरी गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। उनके सुरों ने पूरे सभागार को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। हर प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, मनोज पाटिल, भाजपा नेता राजीव रतन मिश्रा, नगरसेवक अभय ककड़, नगरसेविका कल्पना नागपुरे, नगरसेविका पिंकी राठोड़ तथा समाजसेवी सुरेंद्र मिश्रा प्रमुख रूप से शामिल रहे। संस्था की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया।
संस्था के सचिव एवं मुख्य आयोजक अखिलेश जे. मिश्रा ने सभी अतिथियों, कलाकारों और कला प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
कार्यक्रम की सफलता में अशोक भाटिया, महेंद्र जोशी, रीता राधेश्याम शुक्ला, आर.एन. तिवारी तथा समस्त आयोजन समिति के सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
कजरी महोत्सव-2026 ने न केवल सावन की सांस्कृतिक मिठास को जीवंत किया, बल्कि लोक संगीत और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी सशक्त संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान लोक संस्कृति, संगीत और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।


