
प्रशांत कटियार
हर वर्ष जून माह के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है। यह दिन उन पिताओं के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने अपने परिवार के लिए अनगिनत त्याग किए हैं। एक पिता केवल परिवार का मुखिया ही नहीं होता, बल्कि वह अपने बच्चों का पहला मार्गदर्शक, संरक्षक और प्रेरणास्रोत भी होता है।
मां जहां बच्चे को ममता का आंचल देती है, वहीं पिता उसे जीवन की कठिनाइयों से लड़ना सिखाता है। पिता अपने सपनों और इच्छाओं का त्याग कर अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटा रहता है। वह अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए परिवार की खुशियों के लिए दिन-रात मेहनत करता है। अक्सर पिता अपने संघर्षों और परेशानियों को परिवार से छिपाकर रखता है ताकि उसके बच्चे और परिवार सुरक्षित एवं खुशहाल रह सकें।
समाज में पिता की भूमिका समय के साथ और भी व्यापक हुई है। आज का पिता केवल आर्थिक जिम्मेदारियां ही नहीं निभा रहा, बल्कि बच्चों की शिक्षा, संस्कार, भावनात्मक विकास और उनके सपनों को पूरा करने में भी सक्रिय भागीदारी कर रहा है। वह अपने बच्चों का मित्र बनकर उनकी समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने का प्रयास करता है।
फादर्स डे केवल उपहार देने या शुभकामनाएं देने का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने पिता के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का अवसर है। जिन लोगों के पिता उनके साथ हैं, उन्हें इस दिन अपने पिता के साथ समय बिताना चाहिए और उनके योगदान के लिए धन्यवाद देना चाहिए। वहीं जिनके पिता इस दुनिया में नहीं हैं, वे उनकी यादों को सहेजकर उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।
आज के व्यस्त जीवन में हम अक्सर अपने माता-पिता के त्याग और संघर्षों को भूल जाते हैं। फादर्स डे हमें याद दिलाता है कि पिता का प्रेम भले ही कम शब्दों में दिखाई दे, लेकिन उसकी गहराई अथाह होती है। पिता वह मजबूत दीवार है जो परिवार को हर संकट से बचाती है और वह छांव है जिसके नीचे पूरा परिवार सुरक्षित महसूस करता है।
वास्तव में, पिता का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके प्रति आदर, प्रेम और कृतज्ञता का भाव जीवन भर बना रहना चाहिए। क्योंकि पिता का साया जीवन की वह अमूल्य पूंजी है, जिसकी कीमत शब्दों में नहीं आंकी जा सकती।


