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Thursday, June 11, 2026

“वक्फ बोर्ड है या भू-माफिया बोर्ड?” मुख्यमंत्री योगी के कड़े तेवर , बोले- एक-एक इंच जमीन का होगा हिसाब

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– फर्रुखाबाद जमशेद अब्बास, अथर अब्बास पर रडार
– फर्रुखाबाद प्रशासन गंभीर
– शहर की वेशकीमती ज़मीनो पर कब्जो को लेकर बोर्ड की टेड़ी नजर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में वक्फ संपत्तियों को लेकर एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोलते हुए साफ शब्दों में कहा कि “यह समझना मुश्किल है कि यह वक्फ बोर्ड है या भू-माफिया बोर्ड।” मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि वक्फ के नाम पर कब्जाई गई एक-एक इंच जमीन वापस ली जाएगी और उसकी जांच कराई जा रही है।इसके बाद फर्रुखाबाद में गैंग पर शिया बोर्ड गंभीर हो गया है,मुतबल्ली जमशेद अब्बास को पद से हटा दिया गया, अब बड़ी कार्यवाही की तैयारी है। सांसद मुकेश राजपूत विधायक सुशील शाक्य और मंत्री दयाशंकर सिंह अरुण सक्सेना नें भी सरकार को पत्र लिखे हैं।

मुख्यमंत्री के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। योगी ने संकेत दिया कि सरकार अब वक्फ संपत्तियों की व्यापक जांच और कथित अवैध कब्जों के खिलाफ बड़े अभियान की तैयारी में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वक्फ संबंधी कानूनों और प्रक्रियाओं में आवश्यक बदलाव किए हैं तथा वक्फ के नाम पर दर्ज संपत्तियों की पड़ताल कराई जा रही है। उनका कहना था कि जिन लोगों ने वक्फ के नाम पर सरकारी या निजी जमीनों पर कब्जा किया है, उनसे जमीन वापस ली जाएगी।
योगी ने यह भी कहा कि ऐसी जमीनों का उपयोग गरीबों के लिए आवास, शिक्षा संस्थान, अस्पताल और अन्य जनकल्याणकारी परियोजनाओं में किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है जहां वक्फ बोर्ड के पास सबसे अधिक संपत्तियां दर्ज हैं। सरकारी और बोर्ड अभिलेखों के अनुसार प्रदेश में हजारों वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं, जिनकी संख्या एक लाख से अधिक इकाइयों तक बताई जाती रही है। इनमें कब्रिस्तान, मस्जिदें, ईदगाह, दरगाह और अन्य धार्मिक व सामाजिक उपयोग की संपत्तियां शामिल हैं। इन्हीं संपत्तियों के स्वामित्व, उपयोग और कब्जे को लेकर समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में अयोध्या के विकास का विरोध करने वालों पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग वर्षों तक अयोध्या के विकास और उसकी सांस्कृतिक पहचान का विरोध करते रहे, उन्हें अब वहां जाने का नैतिक अधिकार नहीं है।

योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने अयोध्या को केवल धार्मिक नगरी नहीं बल्कि वैश्विक आस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के केंद्र के रूप में विकसित किया है।
मुख्यमंत्री ने धर्मांतरण और घर वापसी के मुद्दे पर भी अपनी राय रखते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से अपने मूल धर्म और परंपरा में लौटना चाहता है तो उसका स्वागत होना चाहिए। उन्होंने इसे सांस्कृतिक जागरूकता और परंपराओं के प्रति सम्मान का विषय बताया।
मुख्यमंत्री के बयान को राजनीतिक गलियारों में केवल एक भाषण नहीं बल्कि आगामी कार्रवाई का संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में योगी सरकार ने भू-माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर और कब्जा हटाने के अभियान को अपनी प्रमुख पहचान बनाया है। अब वक्फ संपत्तियों को लेकर आया यह सख्त रुख संकेत दे रहा है कि सरकार इस मोर्चे पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।

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