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Thursday, July 23, 2026

हाईकोर्ट का यूपी पुलिस और गृह विभाग पर सख्त प्रहार, मुख्य सचिव से जवाब तलब

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस और गृह विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर गंभीर नाराजगी जताते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है, वहीं अपर मुख्य सचिव (गृह) को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट उस समय और अधिक सख्त हो गया जब बिना किसी निर्देश के डीसीपी साउथ न्यायालय में उपस्थित हो गए। कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जनसुनवाई और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी छोड़कर अधिकारियों का इस प्रकार न्यायालय पहुंचना जनहित के खिलाफ है। न्यायालय ने इसे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में गंभीर खामी और लापरवाही का उदाहरण बताया।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारी विभाग न्यायालय के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि न्यायालय की निगरानी वाले मामलों में यह स्थिति है तो सामान्य मामलों में आम जनता को किस प्रकार की प्रशासनिक व्यवस्था मिल रही होगी।

न्यायालय की तल्ख टिप्पणियों से साफ संकेत मिले हैं कि पुलिस और गृह विभाग की जवाबदेही को लेकर अदालत अब और सख्त रुख अपनाने के मूड में है। मामले की अगली सुनवाई में मुख्य सचिव और गृह विभाग की ओर से दाखिल जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर हाईकोर्ट की यह सख्त टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विभिन्न मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब निगाहें 15 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जब सरकार को अपने पक्ष और कार्यप्रणाली पर अदालत के समक्ष जवाब देना होगा।

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