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Thursday, June 4, 2026

ध्वस्त व्यवस्था :सितबनपुर पिथू गौशाला में 700 से घटकर 300 रह गए गोवंश

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– रिकॉर्ड और हकीकत में भारी अंतर

– राष्ट्रमाता की गूंज रही मांग और गौशालाओं मे गायब होते गोवंश
– बोला ग्राम सचिव, मेरा कोई लेना-देना नहीं

फर्रुखाबाद। एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार आवारा और निराश्रित गोवंशों के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी ओर ब्लॉक मोहम्मदाबाद स्थित सितबनपुर पिथू गौशाला में गोवंशों की संख्या में भारी कमी और बदहाल व्यवस्थाओं ने पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला ऐसे समय सामने आया है जब ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गाय को राष्ट्रीय स्तर पर “राष्ट्रमाता” और राज्य स्तर पर “राजमाता” घोषित करने की मांग को लेकर देशभर में ‘गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा’ निकाल रहे हैं और उनकी यात्रा फर्रुखाबाद जनपद से भी होकर गुजर रही है।
सूत्रों के अनुसार पूर्व मे सितबनपुर पिथू गौशाला में लगभग 700 गोवंश मौजूद थे। उस समय यह गौशाला जिले की सबसे बेहतर गौशालाओं में गिनी जाती थी। तत्कालीन जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह स्वयं हर माह गौशाला का निरीक्षण करते थे और व्यवस्थाओं की खुले मंचों पर सराहना भी करते थे। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। गौशाला से जुड़े एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि वर्तमान में यहां महज 300 के आसपास गोवंश ही बचे हैं, जबकि अभिलेखों में संख्या कुछ और बताई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर लगभग 400 गोवंश कहां चले गए यदि वास्तव में संख्या में इतनी बड़ी गिरावट आई है तो इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी। सरकार प्रत्येक गोवंश पर प्रतिदिन लगभग 50 रुपये खर्च कर रही है। इसके अलावा गौशाला के पास लगभग 100 बीघा उपजाऊ भूमि भी है, जिससे हर वर्ष अच्छी पैदावार होती है और अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इसके बावजूद यदि गोवंशों की स्थिति दयनीय है और संख्या लगातार घट रही है तो मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि बड़े स्तर पर जांच का विषय बन जाता है।जब इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव अवधेश बाथम से जानकारी ली गई तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि गौशाला अब एक एनजीओ को सुपुर्द कर दी गई है और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास गौशाला से संबंधित कोई अभिलेख नहीं हैं और न ही उन्हें वर्तमान व्यवस्थाओं की जानकारी है। सचिव का यह बयान प्रशासनिक जवाबदेही पर और बड़े सवाल खड़े कर रहा है। यदि ग्राम पंचायत के अभिलेखों में कोई जानकारी नहीं है तो फिर सरकारी धन और गोवंशों की निगरानी आखिर किसके भरोसे हो रही है,चौंकाने वाली बात यह भी है कि पूर्व में इसी गौशाला पर गोवंश तस्करी जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। हालांकि उन आरोपों की जांच और सत्यता अलग विषय है, लेकिन वर्तमान में गोवंशों की संख्या में भारी कमी ने पुराने विवादों को फिर जीवित कर दिया है। पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।जनपद में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि जब सरकार गोसंरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार गौशालाओं की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दे रहे हैं और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे हैं, तब फर्रुखाबाद की इस चर्चित गौशाला में गोवंशों की संख्या में भारी गिरावट आखिर किसकी नाकामी का परिणाम है।
कभी जिले की आदर्श गौशाला रही सितबनपुर पिथू आज सवालों के कटघरे में खड़ी है। यदि निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो जाए तो यह साफ हो सकता है कि कागजों में दर्ज गोवंश और जमीन पर मौजूद गोवंशों के बीच आखिर कितना बड़ा अंतर है और सैकड़ों गोवंशों का हिसाब कौन देगा।

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