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Tuesday, June 2, 2026

2027 की जंग से पहले विपक्ष में सीटो की जंग

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– बढ़ती दावेदारी से कांग्रेस – सपा में घमासान!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या लोकसभा चुनाव में साथ आए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस विधानसभा चुनाव में भी उसी सहजता से तालमेल बना पाएंगे? राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि कांग्रेस इस बार पहले से अधिक सीटों की मांग कर सकती है, जिससे सपा के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का मनोबल बढ़ा हुआ है। पार्टी नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में उनका जनाधार पहले की तुलना में मजबूत हुआ है, इसलिए विधानसभा चुनाव में भी उन्हें बड़ी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। दूसरी ओर सपा खुद को प्रदेश में भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी शक्ति मानती है और वह सीटों के मामले में कोई बड़ा समझौता करने के मूड में नहीं दिख रही।
सूत्र बताते हैं कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अभी से संगठन को सभी 403 विधानसभा सीटों पर सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। पार्टी स्तर पर संभावित उम्मीदवारों और क्षेत्रवार समीकरणों का आकलन शुरू हो चुका है। सपा की रणनीति साफ है कि सीटों का बंटवारा केवल राजनीतिक दबाव में नहीं बल्कि जीत की संभावना को आधार बनाकर किया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव से पूरी तरह अलग होते हैं। लोकसभा में राष्ट्रीय मुद्दे प्रभावी रहते हैं, जबकि विधानसभा में स्थानीय नेतृत्व, जातीय समीकरण और संगठन की ताकत अधिक महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि सपा अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में कांग्रेस को अधिक जगह देने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रही।
उधर कांग्रेस भी अब केवल सहयोगी दल की भूमिका में रहने को तैयार नहीं दिखती। पार्टी के भीतर यह भावना मजबूत हो रही है कि यदि वह उत्तर प्रदेश में अपना खोया राजनीतिक आधार वापस पाना चाहती है तो उसे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना होगा। यही वजह है कि आगामी दिनों में सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच मोलभाव तेज होने की संभावना है।
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा भी नजर बनाए हुए है। सत्ताधारी दल अच्छी तरह जानता है कि विपक्षी दलों के बीच सीटों को लेकर जितनी अधिक खींचतान होगी, उसका सीधा राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल सकता है। इसलिए भाजपा संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर 2027 की तैयारी में जुटी हुई है।
फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि 2027 का चुनाव नजदीक आते-आते विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि आपसी तालमेल साबित हो सकता है। कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन बढ़ाना चाहती है और सपा अपनी नेतृत्वकारी भूमिका बनाए रखना चाहती है। ऐसे में आने वाले महीनों में सीटों की राजनीति उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों का सबसे गर्म मुद्दा बनने जा रही है।
लोकसभा चुनाव में साथ दिखाई देने वाले दल विधानसभा चुनाव में अक्सर अपने-अपने राजनीतिक हितों के हिसाब से फैसले लेते हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की बढ़ती महत्वाकांक्षा और सपा की संगठनात्मक मजबूती के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। 2027 की लड़ाई की असली शुरुआत शायद सीटों के इसी गणित से होने जा रही है।

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