फर्रुखाबाद। खिमसेपुर क्षेत्र में बूचड़खाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में मिर्जा टेनरी को बूचड़खाना संचालित करने के लिए लाइसेंस दिए जाने के निर्णय को लेकर उस समय भारी विरोध हुआ था। स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ आवाज बुलंद की थी।
तत्कालीन जिलाधिकारी रहे एन . के . एस . चौहान के कार्यकाल में लाइसेंस जारी होने के बाद खिमसेपुर और आसपास के क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। विरोध करने वालों का तर्क था कि बूचड़खाना स्थापित होने से पर्यावरण, भूजल और स्थानीय जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उस समय फर्रुखाबाद के सांसद रहे चंद्र भूषण सिंह , जिन्हें क्षेत्र में मुन्नू बाबू के नाम से भी जाना जाता है, ने भी इस मामले पर आपत्ति दर्ज कराई थी। जनभावनाओं को देखते हुए यह मुद्दा लंबे समय तक राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा था ।और मिर्जा टेनरी के सीईओ साहित कई जिम्मेदार जनता द्वारा खड़ेड़े गए थे।
दिलचस्प तथ्य यह है कि उस समय जिले के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत रहे एन.के.एस. चौहान वर्तमान में योगी आदित्यनाथ के ओएसडी (विशेष कार्याधिकारी) के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। साथ ही जनता दर्शन के प्रभारी हैं।ऐसे में खिमसेपुर बूचड़खाना प्रकरण की चर्चा होने पर उनके उस समय के प्रशासनिक निर्णयों को लेकर भी सवाल उठाए जाते हैं।
हालांकि यह भी तथ्य है कि किसी भी लाइसेंस अथवा प्रशासनिक अनुमति का निर्णय उस समय लागू नियमों, विभागीय रिपोर्टों और वैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर लिया जाता है। इसलिए उस समय लिए गए निर्णयों की वैधता और परिस्थितियों का मूल्यांकन उपलब्ध अभिलेखों और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है।
खिमसेपुर बूचड़खाना विवाद आज भी फर्रुखाबाद के उन चर्चित मामलों में गिना जाता है, जहां प्रशासनिक फैसले, जनविरोध और राजनीतिक हस्तक्षेप एक साथ देखने को मिले थे। वर्षों बाद भी यह मामला स्थानीय राजनीति और जनचर्चा का हिस्सा बना हुआ है।


