प्रशासन बना तमाशबीन
फर्रुखाबाद
मोहम्मदाबाद स्थित प्रसिद्ध नीम करौली मंदिर इन दिनों श्रद्धा का नहीं बल्कि डर और दहशत का केंद्र बनता जा रहा है। मंदिर परिसर में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं, महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोग हाथ में प्रसाद या खाने-पीने का सामान लेकर मंदिर परिसर में जाने से डरने लगे हैं।प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार बंदर अचानक श्रद्धालुओं पर झपट्टा मार देते हैं, महिलाओं के हाथ से प्रसाद और पर्स छीन लेते हैं, बच्चों को दौड़ाकर डराते हैं और कई बार हमला कर घायल भी कर चुके हैं। मंदिर आने वाले कई श्रद्धालु बंदरों के हमले में चोटिल हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही।
मंदिर परिसर में हर समय बंदरों के झुंड इधर-उधर घूमते दिखाई देते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सुबह और शाम के समय दर्शन करने आने वाले भक्तों को उठानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब यह समस्या भयावह रूप ले चुकी है। इसके बावजूद नगर प्रशासन, वन विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित दिखाई दे रहे हैं।मंदिर के पुजारी ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह अपने स्तर से रोजाना बंदरों को भगाने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह काम प्रशासन का है। पुजारी का कहना है कि कई बार अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी घटना का इंतजार क्यों कर रहे हैं?
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर जैसे धार्मिक स्थल पर यदि लोग सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे तो यह प्रशासन की बड़ी विफलता मानी जाएगी। महिलाओं और बच्चों में खासा डर बना हुआ है। कई श्रद्धालुओं ने तो बंदरों के डर से मंदिर आना तक कम कर दिया है।
स्थानीय नागरिकों और भक्तों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द बंदरों को पकड़वाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।


