खुद पर कार्रवाई से बचने के लिए डीएम, एसपी, डीजीपी से लेकर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया तक को बनाता रहा पार्टी
आईपीएस आरती सिंह समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगातार दाखिल की गईं रिट और कंटेंप्ट याचिकाएं
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ कचहरी में वर्षों से विवादों, आपराधिक मामलों और कथित फर्जी मुकदमा नेटवर्क के लिए चर्चित अधिवक्ता अवधेश मिश्रा अब केवल जिले के अधिकारियों के लिए ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार और उसकी पूरी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडे के साथ मिलकर अवधेश मिश्रा ने उत्तर प्रदेश सरकार, पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक, आईजी, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, न्यायिक अधिकारियों और यहां तक कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया तक को बार-बार उच्च न्यायालय इलाहाबाद में घसीट कर कानूनी दबाव तंत्र खड़ा कर दिया।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2017 से लेकर वर्ष 2026 तक अवधेश मिश्रा द्वारा 28 से अधिक रिट याचिकाएं, क्रिमिनल रिट और अवमानना प्रार्थना पत्र दाखिल किए गए, जिनमें सरकार और आला अधिकारियों को सीधे पक्षकार बनाया गया। आरोप है कि अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों और शिकायतों की कार्रवाई से बचने के लिए उसने हाईकोर्ट की प्रक्रिया को हथियार की तरह इस्तेमाल किया।
जानकारी के मुताबिक 22 दिसंबर 2017 को कंटेंप्ट रिट संख्या 6238 दाखिल कर उत्तर प्रदेश सरकार को घेरा गया। इसके बाद वर्ष 2018 में रिट संख्या 1325 तथा रिट संख्या 33530 के माध्यम से सरकार और सात उच्च अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया। वर्ष 2020 में 8 दिसंबर को रिट संख्या 2575 दाखिल कर फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला गया।
वर्ष 2022 में रिट संख्या 25402 दिनांक 17 जून 2022, रिट संख्या 19106 दिनांक 4 जुलाई 2022 और रिट संख्या 3867 दिनांक 6 अप्रैल 2022 के जरिए सरकार और उच्च अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया गया। इसी क्रम में 24 फरवरी 2022 को रिट संख्या 2280 दाखिल कर कई बड़े अधिकारियों को पार्टी बनाया गया।
वर्ष 2024 में भी यह सिलसिला जारी रहा। 23 मार्च 2024 को रिट संख्या 4959, 21 जून 2024 को रिट संख्या 10845 और 24 जुलाई 2024 को रिट संख्या 24657 दाखिल कर उत्तर प्रदेश सरकार समेत कई अधिकारियों को घेरा गया। 4 नवंबर 2024 को रिट संख्या 15 के जरिए भी सरकार को पक्षकार बनाया गया।
वर्ष 2025 में 25 जून को रिट संख्या 20985 दाखिल की गई। 1 फरवरी 2025 को रिट संख्या 3587 में उत्तर प्रदेश सरकार, अपर पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक फर्रुखाबाद तथा इंस्पेक्टर अमोद कुमार सिंह समेत कई पुलिस अधिकारियों को पार्टी बनाया गया। इसी दौरान रिट संख्या 18283 भी सरकार के खिलाफ दाखिल की गई।
22 सितंबर 2025 को रिट संख्या 22327 में उत्तर प्रदेश सरकार, पुलिस महानिदेशक, पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ और पुलिसकर्मियों को पक्षकार बनाया गया। 3 नवंबर 2025 को याचिका संख्या 25279 दाखिल कर पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ आईपीएस आरती सिंह , एसआईटी हेड और अन्य पुलिस अधिकारियों को घेरा गया।
इसी क्रम में रिट संख्या 30310 वर्ष 2025 तथा क्रिमिनल रिट संख्या 21998 में पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़, पुलिस अधीक्षक कन्नौज और डीसीआरबी समेत कई अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया गया। रिट संख्या 1840 वर्ष 2025 में यूनियन ऑफ इंडिया, डायरेक्टर जनरल सीआरपीएफ, आईजी सीआरपीएफ, डीआईजी कानपुर समेत कई केंद्रीय अधिकारियों को भी पार्टी बनाया गया।
14 जनवरी 2026 को रिट-सी संख्या 2835 में यूनियन ऑफ इंडिया, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, जिलाधिकारी फर्रुखाबाद और यूथ इंडिया न्यूज़ ग्रुप समेत सात लोगों को पक्षकार बनाया गया। 14 जून 2026 को कंटेंप्ट एप्लीकेशन संख्या 1393 दाखिल कर पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ आरती सिंह, प्रभारी निरीक्षक रणविजय सिंह, निरीक्षक दर्शन सिंह सोलंकी और थाना अध्यक्ष राजीव कुमार समेत कई पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
17 मई 2026 को रिट संख्या 2347 दाखिल कर उत्तर प्रदेश सरकार, पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़, आईपीएस आरती सिंह और पत्रकार अजय चौहान को पार्टी बनाया गया। वहीं 13 जनवरी 2026 को रिट संख्या 330 तथा 13 मार्च 2026 को रिट संख्या 4113 दाखिल कर डीजीपी, आईजी कानपुर समेत कई उच्च अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया गया। 27 अप्रैल 2026 को रिट संख्या 2909 दाखिल कर फिर कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया।
गौरतलब है कि अवधेश मिश्रा पर फर्जी गैंगरेप, छेडख़ानी, दलित उत्पीडऩ, 307 और पाक्सो जैसे गंभीर मामलों में झूठे मुकदमे दर्ज कराने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। आरोप यह भी है कि फर्रुखाबाद और कन्नौज में अधिकारियों, पत्रकारों, शिक्षकों, समाजसेवियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगातार शिकायतें कराकर भय और दबाव का माहौल बनाया गया।
चौंकाने वाली बात यह भी बताई जा रही है कि प्रदेश सरकार के ही एक विधायक और एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पर इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं। यही वजह रही कि वर्षों तक विवादों में रहने के बावजूद इस नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी। दैनिक यूथ इंडिया द्वारा अवधेश मिश्रा और उसके कथित नेटवर्क से जुड़े मामलों को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद यूथ इंडिया और उसके संपादक शरद कटियार के खिलाफ भी कई रिट याचिकाएं दाखिल की हैं ।
‘विषकन्या’ गिरफ्तारी के बाद दबाव में अवधेश मिश्रा!
सूत्रों के अनुसार फतेहगढ़ कचहरी से जुड़े चर्चित अधिवक्ता अवधेश मिश्रा की कथित विषकन्या के पकड़े जाने के बाद उस पर पुलिस और जांच एजेंसियों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। चर्चा है कि पूरे घटनाक्रम के बाद मिश्रा ने अपने करीबी लोगों के बीच यह बात कही कि मामला संभालने और प्रभाव बनाए रखने में चाहे 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक खर्च क्यों न हो जाए, लेकिन सिस्टम पर पकड़ कमजोर नहीं पडऩी चाहिए।
बताया जा रहा है कि एसपी कोर्ट में गिरफ्तारी की कार्रवाई के बाद से ही पूरे नेटवर्क में हलचल तेज हो गई है। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि मिश्रा अपने लोगों के बीच यह दावा कर रहा है कि जब तक न्यायालय से मिला स्टे प्रभावी रहेगा, तब तक गिरफ्तारी आसान नहीं होगी और इसी बीच वह अपने सेटिंग नेटवर्क को और मजबूत करने में सफल हो जाएगा।
सूत्रों का यह भी कहना है कि अवधेश मिश्रा को भरोसा है कि प्रभाव और पहुंच बढऩे के बाद खर्च किया गया पैसा कई गुना तरीके से वापस निकल आएगा। पूरे मामले को लेकर जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग इस कथित नेटवर्क की आर्थिक ताकत, कानूनी पकड़ और राजनीतिक संरक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं।


