– साढ़े 9 साल पहले शहर में अंडरग्राउंड बिजली लाइन का सपना दिखाया गया
– दूसरे कार्यकाल के अंत तक भी हालात जस के तस
– नहीं हुईं आज तक बीजेपी एमएलए की आवाज़, स्वीकृत होते रहे प्रस्ताव
यूथ इंडिया संवाददाता, फर्रुखाबाद।
फर्रुखाबाद शहर में झूलते और जर्जर बिजली तारों का मुद्दा पिछले लगभग दो दशकों से राजनीतिक घोषणाओं और सरकारी प्रस्तावों के बीच झूलता नजर आ रहा है। सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने वर्षों पहले शहर की मुख्य सड़कों के किनारे लगे बिजली के खंभों को हटाकर विद्युत लाइनों को अंडरग्राउंड करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था। लेकिन विडंबना यह है कि उनका दूसरा कार्यकाल भी समाप्ति की ओर बढ़ रहा है और शहर आज भी बदहाली, झूलते तारों और अव्यवस्थित बिजली व्यवस्था की पहचान बना हुआ है।
बताया जाता है कि स्वर्गीय ऊर्जा मंत्री के परिवार से जुड़े राजनीतिक प्रभाव और लगातार घोषणाओं के बावजूद शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल बिजली व्यवस्था में जमीन पर बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दिया। दो दिन पहले फिर विधायक द्वारा विद्युत विभाग से जुड़े तीन बड़े प्रस्ताव स्वीकृत होने की जानकारी दी गई, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि “प्रस्ताव” और “घोषणाएं” तो वर्षों से सुनाई दे रही हैं, जबकि शहर की तस्वीर आज भी नहीं बदली।
फर्रुखाबाद के मुख्य बाजारों, संकरी गलियों और प्रमुख मार्गों पर आज भी बिजली के जर्जर खंभे और नीचे झूलते तार दुर्घटनाओं को खुला न्योता देते नजर आते हैं। कई स्थानों पर तारों का जाल इतना खतरनाक हो चुका है कि बारिश और आंधी के समय लोगों में भय का माहौल बन जाता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शहर में अरबों रुपये के विकास कार्यों और विद्युत परियोजनाओं की घोषणाएं तो होती रहीं, लेकिन धरातल पर हालात लगातार बदतर होते गए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अंडरग्राउंड केबलिंग और पोल शिफ्टिंग का कार्य गंभीरता से कराया गया होता तो आज शहर को इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल चुकी होती।
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि आखिर वर्षों से लंबित इन परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति क्या है। जनता यह जानना चाहती है कि बार-बार स्वीकृत होने वाले प्रस्ताव आखिर फाइलों से बाहर निकलकर जमीन पर कब उतरेंगे।
फर्रुखाबाद की बदहाल बिजली व्यवस्था अब केवल सुविधा का मुद्दा नहीं बल्कि जनसुरक्षा का विषय बन चुकी है। इसके बावजूद योजनाओं की धीमी रफ्तार और लगातार होती घोषणाएं लोगों के बीच सवाल खड़े कर रही हैं।


