43 C
Lucknow
Monday, May 18, 2026

होर्मुज संकट से गहराया वैश्विक तेल संकट

Must read

 

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को हिला कर रख दिया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज में नाकेबंदी जैसी स्थिति बनने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और वैश्विक तेल संकट लगातार गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

भारत अब तक इस वैश्विक संकट से काफी हद तक बचा हुआ था। इसकी सबसे बड़ी वजह रूस से लगातार सस्ता कच्चा तेल खरीदना रही। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद भारत ने रणनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए रूसी तेल आयात जारी रखा। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच राहत मिलती रही और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपेक्षाकृत नियंत्रित रहीं।

हालांकि अब भारत के लिए मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। अमेरिका ने भारत सहित कुछ देशों को मिली रूसी तेल खरीद संबंधी राहत को आगे बढ़ाने के संकेत नहीं दिए हैं। माना जा रहा है कि वॉशिंगटन अब रूस पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है। यदि भारत पर रूसी तेल आयात को सीमित करने का दबाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर देश की ऊर्जा लागत और महंगाई पर पड़ सकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति बाधित होने या कीमतों में भारी उछाल का असर सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। अभी तक रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदकर भारत ने बड़ी राहत हासिल की थी, लेकिन यदि यह विकल्प कमजोर पड़ता है तो सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है। इस रास्ते से प्रतिदिन करोड़ों बैरल कच्चे तेल की सप्लाई होती है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने और नौवहन बाधित होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन, उद्योग, बिजली उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई देगा।

भारत सरकार फिलहाल हालात पर नजर बनाए हुए है। ऊर्जा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय लगातार वैश्विक परिस्थितियों का आकलन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि भारत वैकल्पिक तेल आपूर्ति स्रोतों पर भी काम कर सकता है ताकि किसी बड़े संकट की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article