यमुनानगर: हरियाणा (Haryana) के स्वास्थ्य विभाग (health department) और पुलिस ने एक फर्जी ऑपरेशन के दौरान दो लोगों की गिरफ्तारी के साथ कथित तौर पर अवैध भ्रूण लिंग निर्धारण रैकेट (Illegal sex determination racket) का भंडाफोड़ किया है। उन्होंने बताया कि यह रैकेट हरियाणा के यमुनानगर और उत्तर प्रदेश के देवबंद क्षेत्र के बीच सक्रिय था।नोडल अधिकारी डॉ. विपिन गोंडवाल के नेतृत्व में जिले की प्रसवपूर्व निदान तकनीक (पीएनडीटी) टीम ने सदर पुलिस स्टेशन के कर्मियों के साथ मिलकर छापेमारी की।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया, रैकेट की सूचना मिलने के बाद एक गर्भवती महिला को फर्जी बनाकर आरोपियों के पास भेजा गया। आरोपियों ने कथित तौर पर महिला को कई घंटों तक इंतजार कराया और फिर उसे उत्तर प्रदेश के चांदपुर जिले के अंबेटा स्थित एक घर में बुलाया। उन्होंने आगे बताया, आरोपियों ने महिला से कहा कि वह जुड़वां बच्चों की मां बनने वाली है और अजन्मे बच्चों का लिंग बताने के लिए प्रत्येक बच्चे से 30,000 रुपये की मांग की। हमने पैसे का इंतजाम किया और फर्जी महिला को आरोपियों के पास वापस भेज दिया।
बाद में महिला को देवबंद ले जाया गया, जहां एक निजी कमरे में भ्रूण का लिंग निर्धारण परीक्षण किया गया, जो देश में अवैध है। अधिकारियों ने बताया कि परीक्षण के दौरान, आरोपी ने एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, एक टैबलेट और वाई-फाई उपकरणों का इस्तेमाल किया और कथित तौर पर महिला को बताया कि भ्रूण लड़का है।
ऑपरेशन पर नज़र रख रही पीएनडीटी टीम और पुलिस ने फिर परिसर पर छापा मारा और दो आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवबंद के बंदेरा गांव के निवासी अजीम और महिला एजेंट बीना उर्फ सुमन के रूप में की। पुलिस ने बताया, छापेमारी के दौरान, ऑपरेशन में इस्तेमाल की गई पोर्टेबल मशीनें और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मौके से जब्त किए गए।
डॉ. गोंडवाल ने भ्रूण के लिंग निर्धारण को “समाज पर एक गंभीर कलंक” बताते हुए कहा कि “बेटी बचाओ” अभियान के तहत अधिकारी इस तरह की प्रथाओं में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। जांच अधिकारी लखविंदर सिंह ने बताया, पुलिस ने आरोपियों से 10,000 रुपये बरामद किए और उनके खिलाफ पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े अन्य मामले सामने आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


