नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्रा पर टैक्स, सेस या किसी प्रकार की पाबंदी लगाए जाने की खबरों को पूरी तरह झूठा और भ्रामक करार देते हुए साफ कहा है कि सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ रिपोर्टों में बिना आधिकारिक पुष्टि के अफवाहें फैलाई गईं, जिनका सच्चाई से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेश यात्राओं पर रोक लगाने या अतिरिक्त टैक्स लगाने जैसी कोई योजना सरकार के पास नहीं है और सरकार का पूरा ध्यान आम लोगों के जीवन को आसान बनाने पर है।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि केंद्र सरकार विदेशी यात्राओं पर अतिरिक्त टैक्स या सरचार्ज लगाने पर विचार कर रही है। रिपोर्टों में पश्चिम एशिया संकट, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और आर्थिक दबाव का हवाला दिया गया था। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि देशहित में लोगों से की गई अपीलों को जबरन प्रतिबंध के रूप में पेश करना गलत है।
दरअसल, कुछ दिन पहले हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से अपील की थी कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए गैर जरूरी विदेश यात्राओं, अत्यधिक ईंधन खपत और सोने की खरीदारी से कुछ समय तक बचना देशहित में मददगार हो सकता है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की भी सलाह दी थी। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विदेश यात्रा पर संभावित प्रतिबंधों की चर्चाएं तेज हो गई थीं, लेकिन अब स्वयं प्रधानमंत्री ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बता दिया है।
इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी पहुंचे, जहां से उनकी पांच देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा की शुरुआत हुई। एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया और संयुक्त अरब अमीरात के लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को सुरक्षा घेरे में लेकर विशेष सम्मान दिया। प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, व्यापार, निवेश, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रणनीतिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान कहा कि भारत की प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री हमलों के बीच भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौता पत्रों का आदान-प्रदान भी हुआ।
प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात को भारत का “दूसरा घर” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्वास और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। अबूधाबी के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा करेंगे, जहां वह कई राष्ट्राध्यक्षों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य व्यापार, हरित ऊर्जा, तकनीक, निवेश और वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देना है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की सक्रिय कूटनीति, मजबूत वैश्विक भूमिका और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर रणनीति का बड़ा संकेत है।


