वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चलेगी कोर्ट की कार्यवाही
जजों और वकीलों को मिलेगी डिजिटल सुविधा
कार पूलिंग और ट्रैफिक दबाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए सप्ताह में दो दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करने का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था को “वर्क फ्रॉम होम” मॉडल और डिजिटल न्याय प्रणाली की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते ट्रैफिक, प्रदूषण और लंबी दूरी की यात्रा से होने वाली परेशानियों को देखते हुए यह व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत कई मामलों की सुनवाई अब ऑनलाइन माध्यम से होगी, जिससे जजों, वकीलों और पक्षकारों को सुविधा मिलेगी।
बताया जा रहा है कि इस फैसले के पीछे कार पूलिंग और ईंधन बचत जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है। अदालत का मानना है कि डिजिटल सुनवाई से अनावश्यक यात्रा कम होगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुगम बन सकेगी।
कोरोना काल में शुरू हुई वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था को अब स्थायी और व्यवस्थित रूप देने की तैयारी मानी जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे छोटे शहरों के वकीलों और दूरदराज के पक्षकारों को भी बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें हर तारीख पर दिल्ली पहुंचने की मजबूरी कम होगी।
हालांकि कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि संवेदनशील और जटिल मामलों में फिजिकल सुनवाई की अपनी अलग अहमियत है। ऐसे में ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।


