लखनऊ। बीते बुधवार को आए भीषण आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने भयावह तबाही मचा दी। 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं, आकाशीय बिजली और मूसलाधार बारिश ने कई जिलों को दहला दिया। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 117 लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार यह तूफान हाल के वर्षों की सबसे विनाशकारी मौसमी घटनाओं में शामिल माना जा रहा है। कई जिलों में पेड़ जड़ से उखड़ गए, बिजली के खंभे धराशायी हो गए और कच्चे मकान पलभर में मलबे में बदल गए। ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा तबाही देखने को मिली, जहां खेतों में खड़ी फसलें भी बर्बाद हो गईं।
आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं ने सबसे ज्यादा जानें लीं। कई लोग खेतों में काम कर रहे थे, जबकि कुछ लोग घरों के बाहर मौजूद थे, तभी अचानक बिजली गिरने से दर्दनाक हादसे हो गए। तूफान के दौरान सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई और कई जगह घंटों तक यातायात ठप रहा।
प्रदेश के कई जिलों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। हजारों गांव अंधेरे में डूब गए और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुईं। प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अभी भी सामान्य नहीं हो सके हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तत्काल राहत कार्य तेज करने और घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं। वहीं मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक कई जिलों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की है।
प्रदेश में इस भीषण तबाही के बाद लोग दहशत में हैं। कई परिवारों ने अपनों को खो दिया, जबकि किसानों की सालभर की मेहनत कुछ ही मिनटों में बर्बाद हो गई। उत्तर प्रदेश में आए इस तूफान ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


