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Wednesday, May 13, 2026

“मनोसंवाद” कार्यशाला में मानसिक स्वास्थ्य पर मंथन, युवाओं को भावनात्मक मजबूती का दिया संदेश

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वाराणसी। मनोवैज्ञानिक तनाव, भावनात्मक असंतुलन और बदलती सामाजिक चुनौतियों के बीच युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में गंभीर मंथन शुरू हुआ। मनोविज्ञान विभाग के मनोवैज्ञानिक निर्देशन, परामर्श एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला श्रृंखला “मनोसंवाद : काउंसलिंग एंड मेंटल हेल्थ – एक्सपर्ट पर्सपेक्टिव्स एंड प्रैक्टिसेस” का प्रथम दिवस ज्ञान, संवाद और जागरूकता के माहौल में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। मानसिक स्वास्थ्य को आज की सबसे बड़ी सामाजिक जरूरत बताते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए. के. त्यागी ने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चुनौती बन चुका है। उन्होंने युवाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाने और काउंसलिंग सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की संयोजक एवं मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल ने कहा कि “मनोसंवाद” का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहारिक काउंसलिंग और भावनात्मक प्रबंधन की व्यावहारिक समझ देना है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं युवाओं को संवेदनशील, जागरूक और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनाती हैं।

कार्यशाला में एआरटीसी, आईएमएस बीएचयू के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने युवाओं में बढ़ते तनाव, चिंता और मानसिक दबाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सकारात्मक संवाद, आत्मविश्वास और सही परामर्श मानसिक समस्याओं से बाहर निकलने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

एचआईवी काउंसलर मनीषा राय ने एचआईवी जागरूकता और सामाजिक संवेदनशीलता पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में एचआईवी को लेकर भ्रांतियां और सामाजिक भेदभाव मौजूद हैं, जिन्हें सही जानकारी और भावनात्मक सहयोग से दूर किया जा सकता है।

वहीं आईएमएस बीएचयू की एचआईवी/एड्स काउंसलर एवं मदर एंड बेबी केयर विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा पांडेय ने गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और परिवारों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल में काउंसलिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और संवेदनशील परामर्श परिवारों को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. मुकेश कुमार पंथ ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि परामर्श कौशल का प्रशिक्षण आज समय की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि आगामी सत्रों में मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहारिक काउंसलिंग के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सह-आयोजन सचिव डॉ. दुर्गेश के. उपाध्याय ने विद्यार्थियों से संवाद किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का संचालन विकास विश्वकर्मा और श्रेयाश द्वारा किया गया।

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