एक्सपर्ट्स बोले- छिपाया जा रहा असली खर्च, 95 लाख करोड़ स्वाहा
वाशिंगटन
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ा मुद्दा बन गया है। अमेरिकी संसद में युद्ध पर बढ़ते खर्च को लेकर सरकार घिरती नजर आ रही है। पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया है कि अब तक इस युद्ध में करीब 2.77 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन रक्षा और बजट विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक लागत इससे कई गुना ज्यादा होकर लगभग 95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह युद्ध के वास्तविक खर्च को कम करके दिखा रही है। हार्वर्ड कैनेडी स्कूल की हालिया शोध रिपोर्ट में युद्ध बजट विशेषज्ञ लिंडा बिल्मेस ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध की कुल लागत एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। उनके अनुसार केवल अल्पकालिक सैन्य संचालन पर ही प्रतिदिन अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं, जिसमें मिसाइलें, युद्धपोत, सैनिकों की तैनाती और सैन्य उपकरणों की मरम्मत शामिल है।
अमेरिकी संसद की सुनवाई के दौरान पेंटागन के बजट अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा धनराशि अब युद्ध में खर्च हो चुकी है। नए आंकड़ों में परिचालन खर्च, हथियारों के रखरखाव और युद्ध क्षेत्र में तैनात सैन्य बलों की लागत शामिल की गई है। हालांकि अधिकारियों ने माना कि क्षतिग्रस्त सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे की मरम्मत की लागत अभी इसमें जोड़ी ही नहीं गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध की असली आर्थिक मार आने वाले वर्षों में सामने आएगी। पूर्व सैनिकों के इलाज, रक्षा उत्पादन बढ़ाने और नए हथियार खरीदने पर अमेरिका को भारी रकम खर्च करनी पड़ सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के शुरुआती दिनों में ही अमेरिका ने इतनी मिसाइलें इस्तेमाल कर दीं, जितनी पिछले कई वर्षों में दूसरे युद्ध क्षेत्रों में नहीं की गई थीं।
युद्ध के बढ़ते खर्च का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। बढ़ती महंगाई, रक्षा बजट में इजाफा और कर्ज के बोझ को लेकर संसद में तीखी बहस जारी है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज और तेजी से बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।


