34 C
Lucknow
Wednesday, May 13, 2026

डॉ सुबोध यादव के धोबीपाट पर चित हुए उपनिबंधक रजिस्ट्रार और कम्प्यूटर ऑपरेटर

Must read

– स्कैन कॉपी में लाइन बढ़ानें के मामले नें पकड़ा तूल
– सरकारी प्रयास नें कोर्ट में साबित कर दिया कैसे लिखे गए तमाम मुक़दमे

फर्रुखाबाद। कागजी कलाबाजी कर पहले की भांति एक और जालसाजी का झूठा मुकदमा लिखाने की जुगत करने में इस बार तहसील सदर के उपनिबंधक रजिस्ट्रार , और कंप्यूटर ऑपरेटर डॉ सुबोध यादव के धोबी पाट पर चित्त हो गए, डॉ सुबोध की याचना पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सच जान कडा रुख अख्तियार करते हुए मुक़दमे का आदेश पारित किया इसके बाद मऊदरवाजा पुलिस को सरकारी मुलाजिमों के नाम ही सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करना पड़ गया।

समाजवादी पार्टी के नेता व पूर्व ब्लॉक प्रमुख डॉ. सुबोध यादव की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रीतिमाला चतुर्वेदी के आदेश के बाद थाना मऊदरवाजा पुलिस ने सदर तहसील के उपनिबंधक रविकांत और कंप्यूटर ऑपरेटर प्रदीप सक्सेना के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। शिकायत में सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़, स्कैन कॉपी में बदलाव, धोखाधड़ी और झूठे मुकदमे में फंसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

कोर्ट में दिए गए प्रार्थना पत्र में डॉ. सुबोध यादव ने बताया कि ग्राम सकबाई तहसील सदर स्थित गाटा संख्या 978/0.8660 भूमि का वर्ष 2018 में पेट्रोल पंप के लिए किरायानामा पंजीकृत कराया गया था। बाद में स्टेट हाईवे को नेशनल हाईवे में परिवर्तित किए जाने और इंडियन ऑयल की शर्तों के चलते किरायानामा में संशोधन कराया गया। डॉ सुबोध यादव के अनुसार 12 दिसंबर 2025 को संशोधित दस्तावेज पंजीकृत हुआ, लेकिन उसी दौरान मूल दस्तावेज की स्कैन कॉपी में कथित तौर पर फर्जी तरीके से लाइन जोड़कर जमीन का क्षेत्रफल बढ़ा दिया गया।

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि संशोधित दस्तावेज के पेज संख्या-4 की स्कैन कॉपी का प्रिंट निकालकर उसमें पैरा संख्या-8 में एक अतिरिक्त लाइन जोड़ दी गई। इसके बाद उस पेज को दोबारा स्कैन कर अपलोड किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि मूल रजिस्टर्ड किरायानामा में यह लाइन दर्ज नहीं थी। उन्होंने अदालत को बताया कि मूल और संशोधित दस्तावेजों के फॉन्ट, लाइन स्पेसिंग, अलाइनमेंट और स्कैन क्वालिटी में साफ अंतर दिखाई देता है।

शिकायत में यह भी कहा गया कि विवादित पेज बाकी दस्तावेजों से अलग दिखाई देता है। जहां बाकी पन्ने रंगीन स्कैन में हैं, वहीं पेज संख्या-4 ब्लैक एंड व्हाइट दिखाई देता है। आरोप है कि स्कैन दस्तावेज का प्रिंट निकालकर लाइन जोड़ने के बाद उसे दोबारा स्कैन किया गया, जिसकी पुष्टि वेबसाइट और सर्वर रिकॉर्ड से भी हो सकती है। प्रार्थना पत्र में फोरेंसिक जांच कराने की मांग की गई है।डॉ. सुबोध यादव ने आरोप लगाया कि इस फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया गया। कंप्यूटर ऑपरेटर प्रदीप सक्सेना द्वारा थाना मऊदरवाजा में 2 जनवरी 2026 को एक मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। डॉ सुबोध का कहना है कि करोड़ों रुपये की संपत्तियों के रजिस्ट्री दस्तावेज अगर इस तरह बदले जाएंगे तो आम लोगों का रजिस्ट्री विभाग से भरोसा उठ जाएगा।

कोर्ट के आदेश पर थाना मऊदरवाजा पुलिस ने उपनिबंधक रविकांत और कंप्यूटर ऑपरेटर प्रदीप सक्सेना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।मामले ने रजिस्ट्री विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे प्रकरण की जांच और संभावित फोरेंसिक रिपोर्ट पर जिलेभर की नजर टिकी हुई है। साथ ही इस मामले में उच्च न्यायालय इलाहाबाद में प्रस्तावित याचिका भी पर सुनवाई होनी तय है।जिसमे उच्चाधिकारिओं से भी जवाब माँगा जायेगा।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article