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Wednesday, May 13, 2026

दहेज, धोखा और रखैल का खेल! बेटी का टूटा सपना न्याय के लिए दर-दर भटक रही बुजुर्ग शिक्षिका

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– टूट रही बेटी विजेता

– आरोपी रवि प्रताप सिंह कर रहा गुड़गांव में अय्याशी

– पिता अनंत पाल सिंह दे रहा बहू को धमकियां

कन्नौज/फर्रुखाबाद। एक शिक्षिका मां ने अपनी बेटी की शादी बड़े अरमानों से की, लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद बेटी की जिंदगी कथित तौर पर दहेज लोभ, धोखे और पति की अय्याशी की भेंट चढ़ गई। अब पीड़िता विजेता अपनी बुजुर्ग अध्यापक मां मीना राठौर के साथ न्याय की गुहार लगाते हुए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है। मामला सामाजिक प्रतिष्ठा, महिला उत्पीड़न और वैवाहिक धोखाधड़ी का बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

पीड़िता की मां मीना राठौर बेसिक शिक्षा विभाग में छिबरामऊ के कंपोजिट विद्यालय में तैनात हैं। परिवार के अनुसार उनके पति अनिल सिंह वर्षों पहले सन्यास ले चुके हैं। ऐसे में मां ने अकेले संघर्ष कर बेटी विजेता की शादी 2 मार्च 2025 को बड़े विश्वास के साथ कोतवाली फतेहगढ़ क्षेत्र के दुर्गा कॉलोनी भोलेपुर निवासी आनंद पाल सिंह के बेटे रवि प्रताप सिंह से की थी। बताया गया कि रवि प्रताप सिंह आदित्य बिरला कंपनी के लोन विभाग में कार्यरत है और गुरुग्राम के सेक्टर-28 डीएलएफ फेस-4 स्थित शरबती देवी भवन में रहता है।

परिवार का आरोप है कि शादी के बाद जब विजेता अपने पति के साथ गुरुग्राम पहुंची तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। आरोप है कि रवि प्रताप सिंह पहले से ही एक अन्य महिला के साथ अवैध संबंध में था और उसी के साथ खुलेआम रह रहा था। पीड़िता का आरोप है कि पति न केवल कथित रूप से उस महिला के साथ फ्लैट में रहता था बल्कि उसके सामने ही संबंधों का प्रदर्शन करता था।

मामले ने उस समय विस्फोटक मोड़ ले लिया जब 3 जनवरी 2026 को विजेता ने कथित तौर पर अपने पति को उसकी कथित रखैल के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके पर पुलिस भी पहुंची थी। हालांकि सामाजिक मर्यादा और शादी बचाने की उम्मीद में विजेता ने उसी दिन कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया। लेकिन इसके बाद हालात और बिगड़ गए।

आरोप है कि रवि प्रताप सिंह ने विजेता को प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया। पीड़िता अब अपनी मां के साथ न्याय की लड़ाई लड़ रही है। परिवार का कहना है कि शादी में लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद बेटी को सम्मान नहीं मिला, बल्कि उसे मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि आरोप सही हैं तो क्या शादी केवल सामाजिक आवरण थी? क्या दहेज और प्रतिष्ठा के लालच में एक युवती की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया?

अब पीड़िता विजेता ने जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह से न्याय की गुहार लगाई है। परिवार का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे महिला आयोग और न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

महिला उत्पीड़न और वैवाहिक धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच यह मामला समाज के उस कड़वे सच को उजागर कर रहा है, जहां बेटियों के सपनों को दहेज और धोखे की भेंट चढ़ा दिया जाता है।

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