गंगा एक्सप्रेसवे, मंत्रिमंडल विस्तार और एंटी इनकंबेंसी को मुद्दा बनाकर सपा बना रही नई रणनीति
लखनऊ /फर्रुखाबाद।बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच समाजवादी पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले में भाजपा के खिलाफ बढ़ती एंटी इनकंबेंसी, गंगा एक्सप्रेसवे का जनपद से बाहर चले जाना और हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में फर्रुखाबाद को प्रतिनिधित्व न मिलना अब सपा के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश नेतृत्व ने फर्रुखाबाद को लेकर विशेष रणनीतिक रिपोर्ट तैयार कराई है और संगठनात्मक स्तर पर बड़े फेरबदल की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि समाजवादी पार्टी जिले की चारों विधानसभा सीटों पर नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण खड़े करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि भाजपा के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी का माहौल बन रहा है, जिसका सीधा फायदा आगामी चुनाव में उठाया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार भोजपुर विधानसभा सीट पर सपा एक प्रभावशाली ब्लॉक प्रमुख को आगे बढ़ाने की रणनीति पर विचार कर रही है। पार्टी का आकलन है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत सामाजिक पकड़ और क्षेत्रीय नेटवर्क वाले चेहरे भाजपा को कड़ी चुनौती दे सकते हैं।
वहीं सदर विधानसभा सीट को लेकर भी सपा में गहन मंथन चल रहा है। चर्चा है कि पार्टी यहां पूर्व लोकसभा प्रत्याशी या उनकी पत्नी को चुनावी मैदान में उतारने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। माना जा रहा है कि महिला कार्ड और स्थानीय राजनीतिक पहचान के जरिए भाजपा के परंपरागत समीकरणों में सेंध लगाने की तैयारी की जा रही है।
सबसे अधिक चर्चाएं अमृतपुर विधानसभा को लेकर हैं। सूत्रों का दावा है कि यहां प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री स्तर के एक बड़े चेहरे को चुनाव लड़ाने की रणनीति बनाई जा रही है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि अमृतपुर में सत्ता विरोधी लहर और स्थानीय मुद्दों के सहारे बड़ा राजनीतिक उलटफेर संभव है।
कायमगंज विधानसभा सीट पर भी सपा किसी पूर्व मंत्री को मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का फोकस केवल उम्मीदवार चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि बूथ स्तर से लेकर सेक्टर स्तर तक संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी चल रही है।
गहन राजनीतिक सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी केवल चुनावी चेहरे बदलने तक सीमित नहीं रहना चाहती। प्रदेश नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे में भी बड़े बदलाव के मूड में है। जिला और विधानसभा स्तर पर निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाकर आक्रामक और जमीनी नेताओं को आगे लाने की तैयारी की जा रही है। पार्टी विशेष रूप से युवा, पिछड़ा और मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति पर फोकस कर रही है।
सपा के रणनीतिकारों का मानना है कि फर्रुखाबाद में भाजपा को सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय विकास मुद्दों से हो सकता है। गंगा एक्सप्रेसवे का जनपद से बाहर जाना, मंत्रिमंडल विस्तार में जिले की अनदेखी, रोजगार और उद्योग को लेकर जनता की नाराजगी को विपक्ष बड़े मुद्दे के रूप में पेश करने की तैयारी कर चुका है।
सूत्र बताते हैं कि प्रदेश नेतृत्व को भेजी गई आंतरिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिले में सपा के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी का असर संगठन पर पड़ रहा है। ऐसे में सपा इस अवसर को “राजनीतिक रिकवरी मिशन” के रूप में देख रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समाजवादी पार्टी संगठनात्मक फेरबदल और उम्मीदवार चयन में सही संतुलन बना पाती है तो फर्रुखाबाद 2027 में प्रदेश की सबसे दिलचस्प राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो सकता है। फिलहाल जिले की राजनीति में अंदरखाने तेज हलचल शुरू हो चुकी है और आने वाले महीनों में कई बड़े चेहरे अपने पाले बदलते भी दिखाई दे सकते हैं।


