– तीन विधानसभा वाले जिले में दो मंत्री बनाकर साधे राजनीतिक समीकरण
– सुब्रत भी राज्यसभा में भेजें जाने का करा रहे प्रचार
लखनऊ /कन्नौज।उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कन्नौज की राजनीति अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के गढ़ माने जाने वाले कन्नौज जिले में भाजपा ने बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए तीन विधानसभा वाले जिले से दो मंत्रियों को जगह देकर सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
कन्नौज जिले की तिर्वा, कन्नौज और छिबरामऊ विधानसभा सीटों में भाजपा ने मजबूत राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है। राजनीतिक जानकार इसे सीधे तौर पर अखिलेश यादव के प्रभाव को चुनौती देने की रणनीति मान रहे हैं।
छिबरामऊ सीट से विधायक रहीं अर्चना पांडेय पहले भी योगी सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। लेकिन 2017 से 2022 के कार्यकाल के दौरान खनन विभाग में कथित घूसखोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया था। उस समय यह मामला सत्ता के गलियारों में काफी चर्चा में रहा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त कार्रवाई को लेकर राजनीतिक संदेश भी दिया गया था।
अब मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कन्नौज में भाजपा की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। दूसरी ओर भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार उनके समर्थक लगातार उन्हें राज्यसभा भेजे जाने का प्रचार कर रहे हैं।
कन्नौज में भाजपा के अंदरूनी समीकरण और गुटबाजी भी अब खुलकर सामने आने लगी है। एक ओर पार्टी अखिलेश यादव के प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश में जुटी है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नेताओं के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी तेज होती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा कन्नौज, इटावा और मैनपुरी जैसे सपा के पारंपरिक गढ़ों में विशेष रणनीति के तहत संगठन और सत्ता दोनों स्तर पर आक्रामक तैयारी कर रही है। यही वजह है कि छोटे जिलों में भी जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए बड़े राजनीतिक फैसले लिए जा रहे हैं।


