शरद कटियार
दुनिया में अपराध केवल हत्या, लूट, भ्रष्टाचार या हिंसा भर नहीं होते। कुछ अपराध ऐसे भी होते हैं जिनकी कोई एफआईआर दर्ज नहीं होती, कोई अदालत सुनवाई नहीं करती, लेकिन उनका दर्द इंसान की आत्मा को जिंदगी भर घायल कर देता है। उनमें सबसे बड़ा अपराध है, किसी की उम्मीद तोड़ देना।
जब कोई इंसान टूटकर, हारकर, थककर आपके पास आता है, तब वह केवल शब्द नहीं ढूंढ रहा होता, वह अपने जीने का कारण ढूंढ रहा होता है। वह आपके चेहरे में भरोसा तलाशता है। उसे लगता है कि शायद यह व्यक्ति उसे गिरने नहीं देगा। लेकिन अगर उसी समय उसे धोखा मिले, उपेक्षा मिले या झूठा भरोसा देकर बीच रास्ते छोड़ दिया जाए, तो वह केवल एक रिश्ता नहीं टूटता, उसके भीतर का विश्वास मर जाता है।
ईश्वर शायद हर गलती माफ कर दे, लेकिन किसी की सच्ची उम्मीद तोड़ने वालों को समय कभी माफ नहीं करता। क्योंकि उम्मीद केवल भावना नहीं होती, वह इंसान की आखिरी सांस तक लड़ने की ताकत होती है। जब एक गरीब किसान बैंक के कर्ज के बीच उम्मीद रखता है कि उसका बेटा पढ़कर जिंदगी बदलेगा, जब एक बेरोजगार युवा यह सोचकर संघर्ष करता है कि एक दिन नौकरी मिलेगी, जब एक बीमार मां यह भरोसा करती है कि उसका बेटा उसे बचा लेगा तब वही उम्मीद उन्हें जिंदा रखती है।
और सोचिए, यदि कोई व्यक्ति उस उम्मीद के साथ खेल जाए तो?
वह केवल दिल नहीं तोड़ता, वह किसी की पूरी दुनिया उजाड़ देता है।
आज समाज में सबसे ज्यादा कमी पैसों की नहीं, भरोसे की है। लोग इसलिए नहीं टूट रहे कि उनके पास साधन कम हैं, लोग इसलिए टूट रहे हैं क्योंकि उन्हें हर जगह छल मिला। राजनीति में झूठी उम्मीदें, रिश्तों में स्वार्थ, समाज में दिखावा और सिस्टम में धोखा — इंसान धीरे-धीरे भीतर से खाली होता जा रहा है।
लेकिन इसी दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हार चुके इंसान में फिर से आग भर देते हैं। जो कहते हैं “तू गिरा है, खत्म नहीं हुआ।”जो किसी गरीब बच्चे की फीस भर देते हैं।जो किसी बेरोजगार युवक को कहते हैं “एक बार और कोशिश कर।”
जो किसी डिप्रेशन में डूबे इंसान को यह एहसास दिलाते हैं कि उसकी जिंदगी अभी भी कीमती है।
यही दुनिया का सबसे बड़ा पुण्य है, किसी हारे हुए इंसान को उम्मीद देना।
महाभारत से लेकर रामायण तक, हर युग में वही लोग पूजे गए जिन्होंने टूटे हुए लोगों को खड़ा किया। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को केवल युद्ध नहीं सिखाया, उन्होंने टूट चुके योद्धा को फिर से विश्वास दिया। भगवान राम ने वनवास में भी अपने साथियों को निराश नहीं होने दिया। इतिहास गवाह है कि दुनिया तलवार से नहीं, उम्मीद से जीती जाती है।
आज जरूरत इस बात की नहीं कि आप कितने अमीर हैं, कितने ताकतवर हैं या कितने प्रसिद्ध हैं। असली सवाल यह है कि आपके कारण कितने लोगों ने जीने की हिम्मत पाई? कितने लोगों ने हार मानने के बाद फिर उठने का साहस पाया?
क्योंकि पैसा खत्म हो जाता है, ताकत खत्म हो जाती है, सत्ता खत्म हो जाती है, लेकिन किसी की जिंदगी में जगाई गई उम्मीद अमर हो जाती है।
अगर किसी के जीवन में रोशनी नहीं बन सकते तो कम से कम उसका आखिरी दीपक मत बुझाइए।क्योंकि उम्मीद टूटने की आवाज बाहर नहीं आती, लेकिन अंदर इंसान पूरी तरह बिखर जाता है।


