नई दिल्ली: देश की आर्थिक स्थिति और हाल ही में ऊर्जा बचत से जुड़े सुझावों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति को लेकर स्पष्टता देने की मांग की है। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) से अपील करते हुए कहा कि विदेशी मुद्रा बचाने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने जैसे सुझावों के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या देश किसी आर्थिक दबाव या संकट की स्थिति की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सार्वजनिक अपील पहले कभी नहीं देखी गई, इसलिए सरकार को देश की आर्थिक स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने रखनी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति न बने।
केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से नागरिकों को खाने-पीने में कटौती, अनावश्यक यात्रा, विदेश यात्राओं में कमी और सोना जैसी कीमती वस्तुओं की खरीद घटाने जैसे सुझाव दिए गए हैं, जो सामान्य परिस्थितियों में नहीं देखे जाते। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह किसी आर्थिक दबाव या आपातकाल की ओर संकेत है। केजरीवाल ने यह भी कहा कि ऐसा परिदृश्य देश में पहले कभी नहीं देखा गया है, इसलिए सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आप नेता ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को पारदर्शिता के साथ सामने रखे, ताकि जनता के बीच किसी तरह का भ्रम या चिंता न फैले।
प्रधानमंत्री द्वारा तेलंगाना में एक जनसभा के दौरान अपने संबोधन में नागरिकों से एक वर्ष तक सोना न खरीदने, खाने में तेल की खपत कम करने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की अपील की थी। उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने पर जोर देते हुए वर्क फ्रॉम होम और कार पूलिंग जैसी व्यवस्थाओं को अपनाने की भी बात कही। उनका कहना था कि इन उपायों से संसाधनों की बचत और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ आम जनता से खर्च और खपत कम करने की अपील कर रही है, जबकि दूसरी तरफ बड़े स्तर पर राजनीतिक रैलियों और विदेशी यात्राओं में भारी संसाधनों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि जनता पर आर्थिक दबाव डाला जा रहा है, जबकि सत्ता में बैठे लोग स्वयं खर्चीले कार्यक्रमों में शामिल रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गैस, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच आम लोगों से और अधिक संयम की अपेक्षा करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, जनता को “देशभक्ति” के नाम पर जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जबकि वास्तविक आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
संजय सिंह ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री विदेश यात्राओं पर जा रहे हैं, जिनमें यूएई दौरा भी शामिल है, वहीं दूसरी ओर आम जनता से खर्च कम करने, त्याग करने और बचत करने की अपील की जा रही है। उन्होंने इसे असंतुलित नीति बताते हुए सवाल उठाए कि क्या केवल जनता ही आर्थिक बोझ उठाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आम नागरिकों को महंगाई और बढ़ते खर्च के बीच संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि सत्ता में बैठे लोगों पर कोई रोक-टोक नहीं दिखती। उनके अनुसार, जनता से लगातार “देशभक्ति” के नाम पर संयम की अपेक्षा की जा रही है।
PMमोदी ने क्या-क्या अपील की है?
प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार देश को युद्ध जैसी परिस्थितियों के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे चुनौतियों से निपटने में सहयोग करें और देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में योगदान दें। भाजपा की तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक तनाव और युद्ध के कारण पेट्रोल, डीजल और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा है।
उन्होंने नागरिकों से पेट्रोल और डीजल का विवेकपूर्ण उपयोग करने, शहरों में मेट्रो रेल का अधिक उपयोग करने, कार पूलिंग अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और पार्सल भेजने के लिए रेल सेवाओं का इस्तेमाल करने की अपील की। इसके अलावा, उन्होंने वर्क फ्रॉम होम (WFH) जैसी व्यवस्था को अपनाने का भी सुझाव दिया, ताकि अनावश्यक यात्रा और ईंधन की खपत कम हो सके। प्रधानमंत्री ने खाद्य तेल की खपत कम करने, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी लाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने पर भी जोर दिया।उन्होंने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य देश को आत्मनिर्भर बनाना और विदेशी मुद्रा पर दबाव को कम करना है, ताकि वैश्विक संकट के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूत रखा जा सके।


