फर्रुखाबाद। नगर में बिना अनुमति संचालित हो रहे आरओ प्लांट अब सिर्फ पानी बेचने का माध्यम नहीं बल्कि बड़ा कारोबार बन चुके हैं। शहर के कई मोहल्लों में नियमों को ताक पर रखकर आरओ प्लांट चलाए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है। हालात यह हैं कि जहां एक ओर गर्मी के मौसम में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आरओ प्लांटों से रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई आरओ प्लांट संचालकों के पास न तो वैध अनुमति है और न ही पानी की गुणवत्ता जांच
लोगों का कहना है कि “शुद्ध पानी” के नाम पर जनता से मनमानी वसूली की जा रही है।
नगर के कई क्षेत्रों में छोटे-बड़े आरओ प्लांट तेजी से खुल गए हैं। कई प्लांट रिहायशी इलाकों में ही संचालित हो रहे हैं। आरोप है कि इनमें से अधिकांश प्लांट बिना किसी मानक के भूजल का अत्यधिक दोहन कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आरओ प्रक्रिया में जितना पानी शुद्ध होता है, उससे कई गुना अधिक पानी बेकार निकल जाता है, जिससे जल संकट और गहरा सकता है।
शहरवासियों का कहना है कि कई प्लांटों में मशीनों की नियमित सफाई और फिल्टर बदलने तक की व्यवस्था नहीं है। स्वास्थ्य विभाग या खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जांच न होने से लोगों को यह भी पता नहीं चल पा रहा कि जो पानी वे पी रहे हैं वह वास्तव में सुरक्षित है या नहीं।
लोगों ने आरोप लगाया कि नगर में लंबे समय से बिना अनुमति आरओ प्लांट संचालित हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी बड़े स्तर पर जांच अभियान नहीं चलाया। इससे संचालकों के हौसले बुलंद हैं। नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल अभियान चलाकर अवैध आरओ प्लांटों की जांच करे, पानी की गुणवत्ता की टेस्टिंग कराए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करे।
जल संरक्षण की मांग
सामाजिक संगठनों ने भी आरओ प्लांटों से हो रही पानी की बर्बादी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जब सरकार जल संरक्षण के लिए अभियान चला रही है, तब शहर में खुलेआम हजारों लीटर पानी बर्बाद होना गंभीर विषय है। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि ऐसे प्लांटों के लिए स्पष्ट नियम तय किए जाएं और पानी की बर्बादी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
शहर में “शुद्ध पानी” के नाम पर खुला खेल, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल


