– नोडल अधिकारी की जांच में खुली पोल
– सरकारी योजनाओं में धांधली का आरोप
– स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, “दिव्यांग नहीं फिर भी लेता रहा सरकारी लाभ”
फर्रुखाबाद।फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट ने किया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि आरोपी किसी भी प्रकार से दिव्यांग नहीं है और कथित तौर पर कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण पत्र हासिल किया गया।
मामले को लेकर पल्ला जटवारा निवासी रमेश प्रताप सिंह पुत्र अहिबरन सिंह ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोपी राहुल प्रताप सिंह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल प्रताप सिंह ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर नेत्र बाधित दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया और वर्षों तक रेल, बस तथा अन्य सरकारी योजनाओं में उसका दुरुपयोग करता रहा।
बताया गया कि शिकायत पहले जिलाधिकारी कार्यालय में की गई थी, जिसके बाद समाधान दिवस में भी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। मामला गंभीर पाए जाने पर सक्षम अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग से विस्तृत आख्या मांगी। इसके बाद जो रिपोर्ट सामने आई उसने पूरे प्रकरण की नींव हिला दी।
नोडल अधिकारी दिव्यांग बोर्ड एवं अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सर्वेश की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि राहुल प्रताप सिंह किसी भी प्रकार से दिव्यांग नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार कथित प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से तैयार कराया गया और उसमें उपयोग की गई मोहर व हस्ताक्षर भी संदिग्ध पाए गए।
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिन अधिकारियों के नाम और हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में दर्शाए गए, उन्होंने ही उसे फर्जी बता दिया। अधिकारियों ने साफ कहा कि दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इससे पूरे मामले में फर्जीवाड़े, दस्तावेज कूट रचना और सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका और गहरी हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग की इस रिपोर्ट ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बिना वास्तविक दिव्यांगता के प्रमाण पत्र कैसे जारी हो गया? क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है? क्या सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी एंट्री कर योजनाओं का लाभ उठाया गया? यदि ऐसा है तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्था में गंभीर सेंध का संकेत माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो कई और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं। क्योंकि दिव्यांग प्रमाण पत्र के जरिए रेलवे रियायत, बस यात्रा, सरकारी योजनाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ लिया जाना सीधे सरकारी राजस्व और वास्तविक जरूरतमंद दिव्यांगों के अधिकारों पर चोट माना जा रहा है।
अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। शिकायतकर्ता रमेश प्रताप सिंह ने मांग की है कि आरोपी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर धोखाधड़ी, कूट रचना और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग की धाराओं में मुकदमा कायम किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के फर्जीवाड़े पर रोक लग सके।


