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Wednesday, September 30, 2026

सोमनाथ भारत की अदम्य आत्मशक्ति का प्रतीक, 11 मई को धाम पहुंचेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर 11 मई को सोमनाथ धाम जाने की घोषणा करते हुए देशवासियों के नाम एक विस्तृत पत्र जारी किया है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में सोमनाथ मंदिर को केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की “अदम्य आत्मशक्ति, सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत संकल्प” का प्रतीक बताया है।
प्रधानमंत्री ने लिखा कि वर्ष 2026 की शुरुआत में उन्हें “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” में शामिल होने का अवसर मिला था, जो मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ था। अब 11 मई को पुनर्निर्मित मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर एक बार फिर वहां पहुंचना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि यह वही ऐतिहासिक क्षण होगा, जब वर्ष 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का उद्घाटन किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में सोमनाथ मंदिर के इतिहास, संघर्ष और पुनर्निर्माण का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सदियों तक आक्रमणों और विध्वंस का सामना करने के बावजूद सोमनाथ मंदिर भारत की चेतना में हमेशा जीवित रहा। उन्होंने लिखा कि समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर हमें सिखाता है कि चाहे कितने भी बड़े तूफान आएं, साहस और आत्मबल हर बार फिर खड़ा हो जाता है।
प्रधानमंत्री ने प्राचीन प्रभास क्षेत्र की महत्ता बताते हुए कहा कि शास्त्रों में सोमनाथ की परिक्रमा को पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान बताया गया है। उन्होंने लकुलीश, सोम शर्मा, महाराज धारसेन चतुर्थ, भीम प्रथम, राजा भोज, कर्णदेव सोलंकी, जयसिंह सिद्धराज, कुमारपाल सोलंकी, महिपाल चूड़ासमा और राव खंगार चूड़ासमा जैसी ऐतिहासिक विभूतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने मंदिर और भारतीय संस्कृति की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रधानमंत्री ने पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर , गायकवाड़ राजघराने, वीर हमीरजी गोहिल और वीर वेगड़ाजी भील के योगदान को भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि इन वीरों और संतों के बलिदान ने सोमनाथ की परंपरा को जीवित बनाए रखा।
अपने पत्र में प्रधानमंत्री ने स्वतंत्र भारत में मंदिर पुनर्निर्माण की कहानी का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर 1947 को लौह पुरुष वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर मंदिर पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्यवश सरदार पटेल मंदिर के पुनर्निर्माण को अपनी आंखों से नहीं देख सके, लेकिन उनके विजन को के.एम. मुंशी और नवानगर के जाम साहब ने आगे बढ़ाया।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विरोध के बावजूद राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को मंदिर उद्घाटन समारोह में भाग लेकर उसे ऐतिहासिक बना दिया था। उन्होंने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने संबोधन में सोमनाथ को श्रद्धा और विश्वास की अमर शक्ति का प्रतीक बताया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मुख्यमंत्री काल की यादें साझा करते हुए कहा कि 31 अक्टूबर 2001 को सरदार पटेल की जयंती पर गुजरात सरकार ने सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण की 50वीं वर्षगांठ का भव्य आयोजन किया था, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपायी और वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण अडवाणी भी उपस्थित रहे थे।
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में “विकास भी, विरासत भी” मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन और त्र्यंबकेश्वर से श्रीशैलम तक देश के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों का विकास आधुनिक सुविधाओं के साथ किया गया है, जबकि उनकी पारंपरिक पहचान को भी सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना सशक्त हो रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सोमनाथ धाम आने और इसकी भव्यता का अनुभव करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल मंदिर नहीं, बल्कि भारत की उस अपराजित आत्मा का प्रतीक है, जिसने हर आघात के बावजूद अपनी संस्कृति और पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखा है। उन्होंने जानकारी दी कि वीरों और दानवीरों की स्मृति में अगले एक हजार दिनों तक सोमनाथ में विशेष पूजा का आयोजन भी किया जाएगा।

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