नई दिल्ली: देश की प्रमुख एयरलाइंस Air India, IndiGo और SpiceJet ने सरकार को चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात में एयरलाइन इंडस्ट्री बेहद दबाव में है और ऑपरेशन बंद करने की कगार पर पहुंच सकती है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने सरकार से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। FIA का कहना है कि विमान ईंधन एटीएफ की मौजूदा कीमतें इंडस्ट्री पर बहुत ज्यादा दबाव डाल रही हैं। कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में राहत और वित्तीय मदद की मांग की है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसके साथ ही कई देशों के एयरस्पेस में पाबंदियों के कारण उड़ानों के रूट लंबे हो गए हैं, जिससे एयरलाइंस का खर्च और बढ़ गया है। एफआईए ने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि इस दबाव के कारण एयरलाइन इंडस्ट्री अब बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। एफआईए एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट की भागीदारी वाला संगठन है।
लिखे गए पात्र में अहम मांगें रखी हैं। इसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एक समान फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम लागू करने की मांग शामिल है, जैसा पहले क्रैक बैंड मैकेनिज्म में किया गया था इसके अलावा, एयरलाइंस ने ATF पर लगने वाली 11% एक्साइज ड्यूटी को अस्थायी तौर पर हटाने की भी अपील की है, ताकि मौजूदा संकट से उबरने में मदद मिल सके।
एयरलाइंस का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन लगभग घाटे का सौदा बन गया है। FIA के मुताबिक, अगर ATF की कीमतों में इस तरह का अंतर बना रहा, तो कंपनियों को भारी नुकसान होगा और कई विमानों को ग्राउंड करना पड़ सकता है, जिससे फ्लाइट कैंसिलेशन भी बढ़ेंगे। हाल ही में सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत में बढ़ोतरी को 15 रुपए प्रति लीटर तक सीमित रखा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह बढ़ोतरी 73 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई।
एयरलाइंस ने जेट फ्यूल पर लगने वाले भारी टैक्स को भी समस्या बताया है. FIA के अनुसार, दिल्ली में ATF पर 25% VAT लगता है, जबकि तमिलनाडु में यह 29% तक है। मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में यह 16% से 20% के बीच है। ये छह बड़े शहर देश की कुल एयरलाइन ऑपरेशंस का आधे से ज्यादा हिस्सा संभालते हैं, इसलिए टैक्स का असर पूरे सेक्टर पर पड़ता है।
एयरलाइंस ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि फ्यूल प्राइसिंग को संतुलित किया जा सके और इंडस्ट्री को राहत मिल सके. कंपनियों का कहना है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो एयरलाइन नेटवर्क अस्थिर हो सकता है और सेवाएं प्रभावित होंगी। महंगे ATF, बढ़ते टैक्स और वैश्विक तनाव ने भारतीय एविएशन सेक्टर को मुश्किल दौर में ला खड़ा किया है। अब नजर सरकार के फैसलों पर है, जो तय करेंगे कि इंडस्ट्री को राहत मिलती है या संकट और गहराता है।


