– सिस्टम पर सवाल, नई तैनाती के बीच पुरानी छाया कायम
– डटे हैं नारायण के सेवा निवृत भक्त
फर्रुखाबाद। जिले के कैम्प कार्यालय का माहौल इन दिनों असामान्य बना हुआ है। चर्चित नारायण की विदाई हो चुकी है, लेकिन उनके समर्थकों का जमावड़ा अब भी उसी तरह बना हुआ है,मानो कुर्सी गई हो, प्रभाव नहीं।
सूत्रों के मुताबिक, कैम्प कार्यालय में रोजाना पहुंच रहे हैं, जो खुद को “नारायण समर्थक” बताते हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब आधिकारिक कार्यभार बदल चुका है, तो फिर यह उन भक्तों की भीड़ किस हैसियत से और किस उद्देश्य से वहां डटी हुई है?
प्रशासनिक हलकों में इसे लेकर असहजता साफ दिखाई दे रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद पुराने नेटवर्क की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि सिस्टम में बदलाव कागजों तक सीमित रह गया है। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि कुछ लोग अब भी फैसलों और सिफारिशों पर असर डालने की कोशिश कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि इससे आम जनता के कामकाज पर असर पड़ रहा है। कैम्प कार्यालय, जो आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान का केंद्र होना चाहिए, वह अब “प्रभाव और पहुंच” का अड्डा बनता जा है।हालांकि नये हुक्मरान अभी मौके पर आसीन नहीं हुए हैं।
यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ पारदर्शिता और निष्पक्षता का दावा है, वहीं दूसरी ओर पुराने प्रभाव की परछाई अब भी कायम है।
नारायण की विदाई के बाद भी कैम्प कार्यालय पर समर्थकों की मौजूदगी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या वास्तव में सिस्टम बदल रहा है, या सिर्फ चेहरे बदल रहे हैं। अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो यह प्रशासनिक अनुशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
विदाई के बाद भी कैम्प कार्यालय पर ‘नारायण समर्थकों’ का डेरा


