लखनऊ।उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को “डिजिटल अनुशासन” में लाने के नाम पर बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर सरकार और बिजली विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत अब तीन बार अलर्ट मिलने के बाद उपभोक्ता की बिजली स्वतः काट दी जाएगी।
जानकारी के मुताबिक जिले में 25 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं के घरों में प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं और लगातार बढ़ते विरोध के बीच अब विभाग ने स्पष्ट नियम सामने रख दिए हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार जैसे ही उपभोक्ता के प्रीपेड बैलेंस का 70% खर्च हो जाएगा और केवल 30% शेष रहेगा, पहला अलर्ट मैसेज मोबाइल पर भेजा जाएगा। यह चेतावनी संकेत होगी कि समय रहते रिचार्ज करा लें, वरना आगे परेशानी तय है।
दूसरा अलर्ट तब आएगा जब बैलेंस सिर्फ 10% रह जाएगा। यानी अब उपभोक्ता के पास बहुत सीमित समय होगा और तत्काल रिचार्ज नहीं कराया तो बिजली जाने की कगार पर पहुंच जाएगी।
तीसरा और अंतिम अलर्ट बैलेंस पूरी तरह खत्म होने पर आएगा और इसके बाद बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के बिजली सप्लाई काट दी जाएगी।
यही नहीं, सूत्रों के अनुसार कई क्षेत्रों में यह कटौती पूरी तरह ऑटोमैटिक सिस्टम से होगी, जहां स्थानीय लाइनमैन या कर्मचारी की कोई भूमिका नहीं होगी।
हालांकि इस सख्ती ने उपभोक्ताओं में नाराजगी भी बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि ग्रामीण और कमजोर वर्ग के लिए यह व्यवस्था मुश्किल खड़ी कर सकती है, जहां रोजाना रिचार्ज कर पाना संभव नहीं होता।
ऊर्जा विभाग का तर्क है कि इससे बिजली चोरी पर रोक लगेगी और बिल बकाया की समस्या खत्म होगी। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि डिजिटल सिस्टम की छोटी सी चूक या नेटवर्क समस्या भी सीधे अंधेरे में धकेल सकती है।
तीन अलर्ट के बाद अंधेरा! प्रीपेड मीटर पर सख्ती—25 हजार उपभोक्ता सीधे निशाने पर


