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Saturday, April 25, 2026

सीडीएससीओ का बड़ा कदम: देशभर में लागू होगी डोजियर आधारित ड्रग लाइसेंसिंग, दवा उद्योग में आएगा पारदर्शिता का नया दौर

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केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने दवा निर्माण क्षेत्र में एक बड़ा सुधारात्मक कदम उठाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लाइसेंसिंग प्राधिकरणों को डोजियर आधारित ड्रग लाइसेंसिंग प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले का उद्देश्य देशभर में दवा लाइसेंसिंग प्रक्रिया को एक समान, पारदर्शी और सरल बनाना है।

इस नई व्यवस्था के तहत अब दवा निर्माण के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों को एक विस्तृत डोजियर जमा करना होगा। इसमें कंपनी से जुड़ी प्रशासनिक जानकारी के साथ-साथ दवा के तकनीकी पहलुओं जैसे गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता का पूरा विवरण शामिल होगा। इसी आधार पर नियामक प्राधिकरण दवाओं को बाजार में उतारने की अनुमति देंगे।

सीडीएससीओ द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रणाली अब ऑनलाइन नेशनल ड्रग लाइसेंसिंग सिस्टम (ओएनडीएलएस) पोर्टल पर लागू की जा चुकी है। इसका उद्देश्य अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियमों और प्रक्रियाओं से होने वाली जटिलताओं को खत्म करना है।

भारत के औषधि महानियंत्रक राजीव सिंह रघुवंशी ने सभी राज्यों को पत्र जारी कर इस गाइडेंस डॉक्यूमेंट को अपनाने की अपील की है। पहले ही राज्यों के नियामक अधिकारियों की बैठक में इसे सिद्धांत रूप में मंजूरी मिल चुकी है, जिससे इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है।

इस सुधार से देश के फार्मा उद्योग, विशेषकर हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में स्थापित दवा निर्माण इकाइयों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। हिमाचल में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क परियोजना को भी इस नई नीति से मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

डोजियर प्रणाली के तहत कंपनियों को अब एक ही मानक प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे लाइसेंसिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार या असमान नियमों की संभावना कम होगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम भारत की दवा नियामक व्यवस्था को और अधिक आधुनिक और विश्वसनीय बनाएगा।

डोजियर को एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है, जिसमें किसी दवा की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़ी सभी वैज्ञानिक जानकारियां शामिल होती हैं। इसी के आधार पर नियामक संस्थाएं यह तय करती हैं कि कोई दवा बाजार में उपयोग के लिए सुरक्षित है या नहीं।

इस फैसले के बाद भारत के दवा उद्योग में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है, जिससे भविष्य में दवा निर्माण और मंजूरी प्रक्रिया और अधिक तेज, पारदर्शी और एकीकृत हो सकेगी।

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