आगरा
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के एक पूर्व संविदा चालक ने अपनी संविदा समाप्ति को लेकर प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चालक ने प्रबंध निदेशक, परिवहन निगम लखनऊ को प्रार्थना पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
मामला 30 नवंबर 2025 का बताया जा रहा है, जब बस को फतेहाबाद से रुनकता के एक लगन-सगाई कार्यक्रम में भेजा गया था। प्रवर्तन टीम की जांच में कथित रूप से 43 यात्री बिना टिकट पाए गए थे, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई।
पूर्व संविदा चालक मिथुन तोमर ने आरोप लगाया कि उस समय बस संचालन एआरएम ताज डिपो के निर्देश पर हो रहा था। उनका कहना है कि जांच के दौरान एआरएम ईदगाह डिपो और यातायात निरीक्षक ने परिचालक से 30 टिकट बनवाने और ड्यूटी में बदलाव दर्ज करने को कहा, जबकि चालक का टिकट व्यवस्था से कोई सीधा संबंध नहीं था।
चालक का यह भी आरोप है कि स्थिति संदिग्ध लगने पर उन्होंने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी थी, लेकिन अधिकारियों को यह पसंद नहीं आया। उनका दावा है कि वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाया गया और बाद में उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई।
मिथुन तोमर के अनुसार, बस को पहले निर्धारित रूट के अनुसार संचालित किया जा रहा था, लेकिन बाद में रुनकता से 42 सवारियां बैठाने की बात सामने आई, जिनमें से कई बिना टिकट पाई गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने 112 पर कॉल कर पुलिस सहायता ली और बाद में कुछ यात्रियों के टिकट बनाए गए।
दूसरी ओर, ताज डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनके अनुसार चेकिंग के दौरान बिना टिकट यात्री पकड़े गए थे और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की गई। फिलहाल मामला विभागीय स्तर पर चर्चा में है और चालक ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई की समीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की है।


