नई दिल्ली
देश में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर महिलाओं को आरक्षण देने में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सोनिया गांधी और राहुल गाँधी पहले ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग कर चुके थे, लेकिन सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पुराने पत्र साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा था कि लोकसभा में बहुमत का उपयोग कर महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया जाए। उन्होंने यह भी दोहराया कि कांग्रेस हमेशा से इस कानून के समर्थन में रही है और इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम मानती है।
राहुल गांधी द्वारा लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2010 में राज्यसभा से पारित हो चुका था, लेकिन लोकसभा में लंबित रहने के कारण अब तक लागू नहीं हो सका। राहुल गांधी ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से अपील की थी कि यदि सरकार गंभीर है तो इसे बिना शर्त समर्थन देकर जल्द पारित कराया जाए, अन्यथा देरी से इसका क्रियान्वयन और मुश्किल हो जाएगा।
विपक्षी दलों ने अब मांग उठाई है कि मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों के आधार पर ही महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए और इसके लिए संसद के आगामी सत्र में नया विधेयक लाया जाए। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को परिसीमन से जोड़कर टालने की कोशिश कर रही है, जिससे महिलाओं को उनका अधिकार मिलने में और देरी हो रही है।
दरअसल, हाल ही में केंद्र सरकार का प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। इस बिल में महिला आरक्षण लागू करने के साथ-साथ लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव था, लेकिन आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह गिर गया। इसके बाद से ही महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि महिला आरक्षण अब केवल सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक एजेंडा बन चुका है, जिस पर आने वाले समय में और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।


