चेन्नई
तमिलनाडु की सियासत में चुनावी हलचल के बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने डीएमके के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जनता भाजपा की “विभाजनकारी और कटु राजनीति” को पूरी तरह नकारती है और राज्य में उसकी कोई मजबूत पकड़ नहीं है।
केजरीवाल ने केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे लोकतंत्र के मूल ढांचे पर हमला बताते हुए कहा कि इस प्रस्ताव से दक्षिण भारत के राज्यों के साथ अन्याय होगा और उनकी राजनीतिक भागीदारी कम हो सकती है। उनके मुताबिक, यही वजह है कि विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालीन की जमकर सराहना की और कहा कि जो भी नेता जनता के लिए अच्छा काम करता है, उसका समर्थन होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिए कि विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर व्यापक एकता बन रही है, जो आने वाले समय में भाजपा के लिए चुनौती बन सकती है।
वहीं दिल्ली से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर, आबकारी नीति मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा को हटाने की याचिका खारिज होने पर केजरीवाल ने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह अदालत के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही इस पर कोई टिप्पणी करेंगे, क्योंकि उन्होंने अपनी दलीलें पहले ही अदालत में रख दी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण भारत में परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर जिस तरह विपक्ष सक्रिय हुआ है, वह आने वाले चुनावों में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल तमिलनाडु से उठी यह सियासी आवाज देशभर में नई बहस को जन्म दे रही है।


