नई दिल्ली। देश की चुनावी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने नई रणनीति तैयार कर ली है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत कई दल मिलकर एक नया प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं, जिसके लिए करीब 200 सांसदों के समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और कई फैसले पक्षपातपूर्ण नजर आते हैं। उनका कहना है कि आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी के चलते विपक्ष अब इस मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाने की योजना बना रहा है।
बताया जा रहा है कि इस पहल में विभिन्न विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता लगातार संपर्क में हैं और एक संयुक्त नोटिस तैयार किया जा रहा है। इससे पहले भी इसी तरह के प्रस्ताव लाए गए थे, लेकिन संसद के दोनों सदनों के सभापतियों ने उन्हें खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी को हटाने के लिए ठोस और प्रमाणित कदाचार जरूरी होता है, केवल राजनीतिक मतभेद इसके लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकते।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और कुछ प्रशासनिक निर्णयों में सरकार का प्रभाव दिखाई देता है। विशेष रूप से मतदाता सूची सुधार (एसआईआर) जैसे मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, जिनसे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
हालांकि, संवैधानिक प्रावधानों के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया बेहद जटिल और सख्त है। इसके लिए संसद में विशेष बहुमत और ठोस आरोपों का प्रमाण होना अनिवार्य है। ऐसे में विपक्ष के लिए यह राह आसान नहीं मानी जा रही, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले इस तरह के मुद्दों का उठना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस विषय पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है, जिससे देश की राजनीति में नया मोड़ आने की संभावना है।


