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Thursday, April 16, 2026

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर संसद में मैराथन बहस

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कल शाम 4 बजे होगी वोटिंग, 18 घंटे तक चर्चा को तैयार सदन

नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के पहले दिन महिला आरक्षण, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयकों को लेकर लोकसभा में जोरदार बहस शुरू हो गई। सरकार ने इन विधेयकों के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को तेज करने का लक्ष्य रखा है, जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि तीनों विधेयकों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर बहस को 18 घंटे तक भी बढ़ाया जा सकता है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन बिलों पर 12 घंटे की चर्चा का प्रस्ताव रखा है। सभी विधेयकों पर मतदान शुक्रवार शाम 4 बजे कराया जाएगा।
इस दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 लोकसभा में पेश किया गया, जिसे 207 सांसदों के समर्थन और 126 के विरोध के साथ पेश करने की मंजूरी मिली। हालांकि मतदान के दौरान एनडीए के 86 सांसद अनुपस्थित रहे, जिस पर विपक्ष ने सवाल भी खड़े किए।
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सदन में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इस विषय पर कांग्रेस पहले ही अपनी स्थिति जाहिर कर चुकी है। वहीं कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने आरोप लगाया कि महिलाओं के नाम पर दिखावा किया जा रहा है और इस मुद्दे पर पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।
दूसरी ओर, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताया। उन्होंने आशंका जताई कि इससे अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है और बड़े राज्यों को अधिक राजनीतिक शक्ति मिल जाएगी।
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है और सरकार संविधान के दायरे में रहकर ही सभी फैसले ले रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जाति आधारित जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
संसद के इस विशेष सत्र में तीनों विधेयकों को लेकर जारी बहस को देश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन पर होने वाला फैसला महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और देश के चुनावी ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा तय करेगा।

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