लखनऊ
राजधानी में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े के दो दिवसीय दौरे के दौरान हुई ताबड़तोड़ बैठकों में यह तय किया गया कि सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने के लिए उन जातियों और वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा, जो अब तक संगठन और सत्ता में पर्याप्त हिस्सेदारी से वंचित रहे हैं।
बैठकों में सामने आए फीडबैक के आधार पर पार्टी ने यह महसूस किया कि चुनाव से पहले सामाजिक संतुलन को साधना बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए पदाधिकारियों को सरकार, संगठन के साथ-साथ आयोग, निगम और बोर्डों में समायोजित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिस पर जल्द ही अमल होने की संभावना है।
दो दिन तक चली इस गहमागहमी के बाद विनोद तावड़े दिल्ली रवाना हो गए हैं, जहां वे पार्टी हाईकमान को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न पदों पर समायोजन और संभावित नियुक्तियों पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
दौरे के दौरान तावड़े ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर प्रदेश के राजनीतिक और संगठनात्मक हालात पर चर्चा की। इसके अलावा उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना सहित कई वरिष्ठ नेताओं से भी विचार-विमर्श किया।
रविवार को तावड़े ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ-साथ पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, सूर्य प्रताप शाही, रमापति राम त्रिपाठी, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी और पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह से भी मुलाकात कर जमीनी फीडबैक लिया।
इन बैठकों के बाद प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें भी तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि संगठनात्मक संतुलन के साथ-साथ सरकार में भी बदलाव संभव है, जिससे विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधा जा सके।
कुल मिलाकर, भाजपा आगामी चुनाव से पहले हर वर्ग को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि सामाजिक संतुलन और राजनीतिक मजबूती दोनों को एक साथ साधा जा सके।


