हरदोई
सोमवार, को केंद्र सरकार द्वारा टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले हजारों शिक्षकों ने शहर में विशाल पैदल मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शिक्षक गांधी भवन में एकत्र हुए, जहां उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष और अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय सचिव आलोक मिश्र के नेतृत्व में सभा आयोजित की गई। सभा को संबोधित करते हुए आलोक मिश्र ने कहा कि पुराने शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना पूरी तरह अनुचित है और इससे वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ अन्याय हो रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस फैसले में संशोधन नहीं किया तो शिक्षक संसद का घेराव करने तक के लिए बाध्य होंगे। प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता को तत्काल वापस लेने की मांग की और इसे सेवा शर्तों के खिलाफ बताया।
इस आंदोलन को कई अन्य संगठनों का भी समर्थन मिला। अटेवा के जैनुल खान ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी थोपना गलत है। वहीं टीएससीटी के शरीफुद्दीन, सुनील कुमार यादव, अरुणेश प्रताप सिंह, दीपांकर गौतम और सुधीर गंगवार सहित कई शिक्षकों ने भी इस मांग का समर्थन किया।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने हरदोई और मिश्रिख के सांसदों को ज्ञापन सौंपा। पैदल मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। अंत में शिक्षकों ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट सुनील कुमार त्रिवेदी को सौंपकर टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने और सेवा नियमों में संशोधन की मांग की।


