लखनऊ। उत्तर प्रदेश के करीब 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को जून महीने में बड़ी राहत मिल सकती है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन द्वारा फ्यूल सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिजली बिल वसूलने के आदेश पर गंभीर आपत्ति जताई है। आयोग ने इस आदेश को प्रथम दृष्टया नियामकीय प्रावधानों के विपरीत मानते हुए पावर कॉरपोरेशन से सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है।
पावर कॉरपोरेशन ने 29 मई को जारी आदेश में जून माह के बिजली बिलों के साथ उपभोक्ताओं से लगभग 1610 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूलने का निर्णय लिया था। इस फैसले के खिलाफ विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग में जनहित प्रत्यावेदन दाखिल कर जांच और वसूली पर रोक लगाने की मांग की थी।
आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि फ्यूल एवं पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) की गणना में पुराने बकाया भुगतान, पूर्व अवधि की देनदारियों और अन्य ऐतिहासिक खर्चों को शामिल कर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला गया है, जो उपभोक्ता संरक्षण के मूल सिद्धांतों और नियामकीय व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी लागतों की वैधता और स्वीकार्यता की जांच किए बिना उनका भार सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता।
उपभोक्ता परिषद का दावा है कि यदि सही गणना की जाती तो जून में बिजली बिल बढ़ने के बजाय करीब दो प्रतिशत तक कम हो सकता था। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से सभी संबंधित खर्चों, बिजली खरीद लागत, ट्रांसमिशन शुल्क और पुराने भुगतानों का पूरा ब्यौरा मांगा है।
हालांकि फिलहाल अतिरिक्त वसूली पर रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन आयोग के सख्त रुख से यह संकेत मिल रहे हैं कि पावर कॉरपोरेशन को अपना आदेश संशोधित करना पड़ सकता है। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिजली बिलों से राहत मिल सकती है।


