नई दिल्ली: प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती और न अंतर् ये तो सुना होगा लेकिन इसका जीता जगता प्रमाण सामने दिल्ली (Delhi) से आ रहा है। दिल्ली में 22 साल की एक बालिग युवती को 60 साल के व्यक्ति से प्यार हो गया। दोनों ने परिवार और समाज की परवाह किए बिना शादी कर ली। दोनों के बीच उम्र का बड़ा अंतर होने के कारण परिवार इस विवाह (Marriage) के खिलाफ था। परिजनों की असहमति के बावजूद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और शादी कर ली। शादी के बाद विवाद और बढ़ गया। परिवार की ओर से इस विवाह को स्वीकार नहीं किए जाने के बाद नवदंपति को कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। इसके बाद दोनों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
दिल्ली की एक अनोखी प्रेम कहानी में 22 साल की बालिग युवती ने 60 साल के व्यक्ति से अपनी मर्जी से शादी कर ली। परिवार के विरोध और कथित धमकियों के बाद जब युवती सुरक्षा की गुहार लेकर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची, तो अदालत ने उसकी स्वतंत्रता और अधिकारों का सम्मान करते हुए दिल्ली पुलिस को नवदंपति को सुरक्षा देने का निर्देश दिया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने की। अदालत ने आदेश जारी करने से पहले युवती से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधे बातचीत की। पीठ ने उसे अपने फैसले पर एक बार फिर विचार करने की सलाह दी, लेकिन युवती अपने निर्णय पर कायम रही।
युवती ने अदालत के सामने स्पष्ट कहा कि उसने अपनी मर्जी से विवाह किया है। उसने कहा कि पति की उम्र अधिक होने के बावजूद वह अपने पति और उनके परिवार के साथ ही रहना चाहती है। उसका फैसला पूरी तरह स्वेच्छा से लिया गया है। युवती का पक्ष सुनने के बाद पीठ ने कहा कि वह बालिग है और उसे अपनी पसंद से जीवन जीने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि उसके परिवार, रिश्तेदारों और समाज को उसके फैसले का सम्मान करना चाहिए। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नवदंपति के साथ-साथ उनके ससुराल वालों को भी पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत के इस आदेश के बाद परिवार के विरोध और कथित धमकियों के बीच नवदंपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पुलिस पर होगी।
याचिकाकर्ता युवती फिलहाल दिल्ली के साकेत थाना क्षेत्र में रह रही है। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित थाने के एसएचओ, एक वरिष्ठ महिला सब-इंस्पेक्टर और बीट कांस्टेबल के मोबाइल नंबर युवती को उपलब्ध करा दिए गए हैं। आपात स्थिति में वह इन अधिकारियों से तत्काल संपर्क कर सकेगी। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि संबंधित बीट अधिकारी सप्ताह में कम से कम दो बार उस घर का दौरा करें, जहां नवदंपति रह रहा है। पुलिस को इन दौरों का पूरा रिकॉर्ड रखने के लिए भी कहा गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था के तहत किए जा रहे इन दौरों और संबंधित कार्रवाई का रिकॉर्ड निर्धारित अवधि के बाद अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
दरअसल, मामला उस समय दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, जब युवती की मां ने अपनी बेटी के लापता होने का दावा करते हुए ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ (Habeas Corpus) याचिका दायर की। मां ने आरोप लगाया था कि उसकी कम उम्र की बेटी को एक बुजुर्ग व्यक्ति बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। अदालत के निर्देश पर पुलिस ने युवती को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश किया। इस दौरान युवती ने अपनी मां के आरोपों को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि उसने अपनी मर्जी से विवाह किया है। युवती के बयान और उसके स्पष्ट रुख के बाद अदालत ने मामले में उसकी इच्छा को महत्व दिया। चूंकि युवती बालिग है और उसने अपनी इच्छा से पति के साथ रहने की बात कही, इसलिए हाईकोर्ट ने मां की याचिका का निस्तारण कर दिया। इसके बाद परिवार की ओर से कथित धमकियों के मद्देनजर युवती ने अपनी और पति की सुरक्षा की मांग की। कोर्ट ने पुलिस को नवदंपति और उनके ससुराल वालों को पर्याप्त सुरक्षा देने के साथ-साथ साकेत थाना क्षेत्र में नियमित निगरानी के निर्देश दिए।


