फर्रुखाबाद। मुहर्रम के अवसर पर शनिवार को शहर के मोहल्ला गढ़ी अब्दुल मजीद खां स्थित इमामबाड़े से जरी के ताजिये का भव्य जुलूस निकाला गया। मातमी धुनों, बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों के बीच निकले इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट से सुसज्जित जरी का ताजिया पूरे जुलूस का प्रमुख आकर्षण बना रहा, जिसे देखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
मोहम्मद शब्लू की देखरेख में निकाले गए इस जुलूस का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। गढ़ी अब्दुल मजीद खां दरीबा पश्चिम स्थित आस्ताना-ए-वारिस पाक पर खादिम अनीसा बेगम वारसी, मोहम्मद फहीम वारसी और मोहम्मद वारिस वारसी ने फूल-मालाएं पहनाकर जुलूस का स्वागत किया। इस दौरान “नारा-ए-तकबीर अल्लाह हू अकबर”, “नबी का दामन नहीं छोड़ेंगे” तथा “नारा-ए-हैदरी या अली” के नारों से वातावरण गूंज उठा।
चार पहिया ठेली पर रखकर निकाले गए जरी के ताजिये को रंग-बिरंगी ट्यूबलाइटों और झिलमिलाती रोशनियों से विशेष रूप से सजाया गया था। ताजिये की भव्यता और कलात्मक सजावट लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। जुलूस में महिलाओं, बच्चों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी पूरे समय मौजूद रहे।
इमामबाड़े पर सुबह आठ बजे से कुरानखानी का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर शाम तक चलता रहा। अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन की याद में इबादत की और उनके बलिदान को याद करते हुए श्रद्धा व्यक्त की। ताजिये के दर्शन के लिए दूर-दराज के मोहल्लों और क्षेत्रों से लोगों का लगातार आना-जाना लगा रहा।
जरी का ताजिया जुलूस नाला मसरत्ता, नाला फिदाई खां, गुदड़ी, पक्का पुल चौराहा, किराना बाजार, नेहरू रोड, घुमना, कोतवाली रोड, सुत्तहटी रोड और साहबगंज चौराहा सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकला। पूरे रास्ते श्रद्धालुओं ने जुलूस का स्वागत किया और शांति एवं सौहार्द का परिचय दिया।
जुलूस का समापन गढ़ी अब्दुल मजीद खां स्थित इमामबाड़े पर हुआ, जहां हजरत इमाम हुसैन की नजर-ओ-नियाज दिलाई गई। कार्यक्रम के अंत में देश और समाज में अमन, भाईचारे तथा खुशहाली के लिए विशेष दुआएं की गईं। मुहर्रम के इस धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सौहार्द की मिसाल पेश की।
अलम के जुलूस में आकर्षण का केंद्र रहा जरी का ताजिया, अकीदतमंदों की उमड़ी भीड़


