लखनऊ: जानकीपुरम प्रथम वार्ड के अंतर्गत आने वाली जानकीविहार कॉलोनी में विभाग द्वारा कराए गए सड़क निर्माण कार्य के दौरान करीब 18 से 20 सीवर मैनहोल चैंबर सड़क के नीचे दब गए हैं। मैनहोल चैंबरों के दब जाने से उनकी नियमित सफाई और रखरखाव का कार्य प्रभावित हो गया है, जिससे क्षेत्र के के ज्यादातर घर इस समस्या से प्रभावित हो रहे है|
इस क्षेत्र की नालियां सीवर मैनहोल से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में मैनहोल के अवरुद्ध होने के कारण घरों में बैकफ्लो की स्थिति उत्पन्न हो गई है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकीविहार निवासी सुनील कुमार पिछले दो दिनों से इस समस्या से जूझ रहे हैं और उनके घर में भी बैकफ्लो की समस्या बनी हुई है।
नालियों का सीवर मैनहोल से अलग होना अत्यंत आवश्यक है। नालियों के माध्यम से प्लास्टिक, मिट्टी एवं अन्य ठोस अपशिष्ट (सॉलिड वेस्ट) सीवर नेटवर्क में पहुंच जाता है, जो मैनहोल और सीवर लाइनों के चोक होने का प्रमुख कारण बनता है। इससे सीवर व्यवस्था प्रभावित होती है और बैकफ्लो की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
यदि सड़क निर्माण कार्य शुरू होने से पहले सम्बंधित विभाग के द्वारा जलकल विभाग एवं संबंधित एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया गया होता तो सीवर मैनहोल चैंबरों को चिन्हित कर सुरक्षित रखा जा सकता था। समय रहते सूचना मिलने पर मैनहोल सड़क निर्माण के दौरान दबने से बच सकते थे और वर्तमान समस्या उत्पन्न नहीं होती।
सुएज इंडिया की टीम क्षेत्र में दबे हुए सीवर मैनहोल की तलाश कर रही है, ताकि उन्हें चिन्हित कर उनकी सफाई सुनिश्चित की जा सके और क्षेत्रवासियों को राहत प्रदान की जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागों के बीच आपसी तालमेल के अभाव के कारण इस प्रकार की समस्याएं अक्सर सामने आती हैं। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों को किसी भी निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले संबंधित विभागों को जानकारी देकर समन्वय स्थापित करना चाहिए, ताकि विकास कार्यों के साथ-साथ आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।


