तेहरान/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ गई है। सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि ईरान ने होर्मुज मार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और स्थिति लगातार बदल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में यदि इस मार्ग पर किसी प्रकार का व्यवधान पैदा होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर भारत समेत तेल आयात करने वाले देशों पर भी पड़ सकता है।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में फिर तनाव बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। हाल के घटनाक्रमों के बाद दोनों देशों के बीच संभावित समझौतों और वार्ताओं के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान को लेकर नए प्रस्तावों और रणनीतियों पर चर्चा की जा रही है, जबकि ईरान अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। निवेशक और तेल बाजार फिलहाल मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।
भारत के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में होर्मुज क्षेत्र में किसी भी बड़े तनाव का सीधा प्रभाव ईंधन कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
फिलहाल दुनिया की निगाहें अमेरिका, ईरान और मध्य पूर्व के ताजा घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा स्थिति यह तय करेगी कि तनाव कम होगा या वैश्विक ऊर्जा संकट और गहराएगा।


