नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए चर्चित छात्र-युवा आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है। शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, भर्ती घोटालों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके दीपके ने कहा कि शनिवार का प्रदर्शन केवल “ट्रेलर” था, असली लड़ाई अभी बाकी है।
जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों और युवाओं को संबोधित करते हुए दीपके ने कहा कि उनके भारत लौटने को लेकर परिवार बेहद चिंतित था। उन्होंने दावा किया कि उनकी मां और बहन को डर था कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। दीपके ने कहा कि यह डर केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि देश के उन लाखों युवाओं के परिवारों का है जो व्यवस्था के खिलाफ सवाल उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब युवाओं को डर की राजनीति से बाहर निकलकर अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना होगा।
प्रदर्शन के बाद सीजेपी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए सात दिन का अल्टीमेटम दिया। संगठन का कहना है कि यदि इस अवधि में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को देशव्यापी रूप दिया जाएगा। सीजेपी के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर शुरू हुई राष्ट्रीय मुहिम है।
दीपके ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें अमेरिका और यूरोप की कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों से आकर्षक नौकरी के प्रस्ताव मिले थे, लेकिन उन्होंने सब छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया। उनका कहना है कि युवाओं की समस्याएं, बेरोजगारी, महंगाई और परीक्षा प्रणाली में बढ़ती अव्यवस्थाएं उन्हें आंदोलन के रास्ते पर ले आईं। उन्होंने कहा कि यह मंच किसी राजनीतिक दल का विस्तार नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज है।
हालांकि सीजेपी की बढ़ती लोकप्रियता के बीच इसे राजनीतिक दल बनाने की चर्चाएं भी तेज हैं, लेकिन दीपके ने फिलहाल इसे एक स्वतंत्र युवा आंदोलन बताया है। उन्होंने कहा कि संगठन आगे की रणनीति देशभर के समर्थकों और सदस्यों से चर्चा के बाद तय करेगा। उनका दावा है कि जंतर-मंतर पर उमड़ी भीड़ यह संकेत है कि देश का युवा अब केवल वादे नहीं, बल्कि व्यवस्था में वास्तविक बदलाव चाहता है।
दीपके के “यह तो सिर्फ ट्रेलर था” वाले बयान ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में शिक्षा, रोजगार और युवाओं के मुद्दों को लेकर आंदोलन की राजनीति और तेज हो सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और सीजेपी के बीच यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।


