एंटी करप्शन की भी नजर
फर्रुखाबाद। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना जिले में कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है। समाज कल्याण विभाग पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित महिलाओं का दावा है कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर ₹5 हजार की मांग की जाती है और पैसा न देने पर वर्षों तक फाइलें लटकाई जाती हैं। आरोप यह भी है कि दलालों के जरिए या सीधे रकम पहुंचते ही वही काम चंद दिनों में पूरा हो जाता है।
श्याम नगर निवासी रंजू गुप्ता, पत्नी स्व प्रवेश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2024 में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि उनसे ₹5 हजार की मांग की गई। आर्थिक तंगी के कारण वह रकम नहीं दे सकीं, जिसके चलते आज तक उनका आवेदन स्वीकृत नहीं हुआ। उनका कहना है कि वह आठ बार समाज कल्याण कार्यालय पहुंचीं और हर बार सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें लौटा दिया गया।
इसी तरह सुनीता देवी ने बताया कि उनका आवेदन भी लंबे समय से लंबित है। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। उनका आरोप है कि रिश्वत नहीं देने की वजह से उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई।
महिला स्वयं सहायता समूह की सीआरपी संगीता ने बताया कि वह पात्र महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए लगातार प्रयास करती हैं। उन्होंने स्वयं कई बार समाज कल्याण कार्यालय जाकर अधिकारियों और कर्मचारियों से अनुरोध किया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि दलालों के माध्यम से पैसे पहुंचाने वालों का काम तत्काल हो जाता है, जबकि पात्र लोग वर्षों तक भटकते रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करती है, लेकिन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार उस मंशा पर पानी फेर रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह रिश्वत देकर किसी का काम नहीं करा सकतीं, क्योंकि इससे उनकी सामाजिक विश्वसनीयता प्रभावित होगी।पीड़ित महिलाओं का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत 19 जून को राज्य महिला आयोग की सदस्य सुनीता सैनी से भी की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।आरोपों के केंद्र में समाज कल्याण विभाग की वरिष्ठ सहायक गीता बाबू हैं। दावा यह भी है कि वह वर्षों से इसी पटल पर तैनात हैं और बिना पैसे कोई काम नहीं होता। रिश्वत की रकम ऊपर तक जाती है, इसलिए बिना पैसे फाइल आगे बढ़ना संभव नहीं है।सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन गंभीर आरोपों की चर्चा लंबे समय से समाज कल्याण विभाग में हो रही है, उसी कार्यालय में वरिष्ठ सहायक गीता बाबू के निकट बैठने वाली जिला समाज कल्याण अधिकारी शालिनी यादव की इन शिकायतों पर आखिर नजर क्यों नहीं पड़ती।
सूत्रों के अनुसार, समाज कल्याण विभाग को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद एंटी करप्शन की टीम भी विभाग की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। बताया जा रहा है कि शिकायतों से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। यह आरोप केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं बल्कि उन गरीब परिवारों के अधिकारों पर भी सीधा हमला है, जिनके लिए यह योजना जीवनयापन का सहारा बनने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। अब निगाहें प्रशासन और शासन पर हैं कि वह इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करता है या नहीं।


