क्रासर
मरीजों की देखरेख छोड़ आपस में बातचीत और मौज-मस्ती में व्यस्त रहने के आरोप, चिकित्सकों को खुद संभालनी पड़ रही व्यवस्था
फर्रुखाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन अस्पताल में तैनात कुछ प्रशिक्षुओं (ट्रेनी स्टाफ) की कार्यशैली इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। आरोप है कि आपातकालीन कक्ष से लेकर विभिन्न वार्डों तक कई प्रशिक्षु मरीजों की देखरेख के प्रति गंभीर नहीं हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय आपस में बातचीत तथा मौज-मस्ती में व्यस्त दिखाई देते हैं।
बताया जाता है कि अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाओं, विषाक्त पदार्थ सेवन, गंभीर बीमारियों और अन्य आपात स्थितियों से जुड़े मरीजों का लगातार आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में मरीजों को तत्काल उपचार और निगरानी की आवश्यकता होती है, लेकिन कई बार प्रशिक्षु स्टाफ मरीजों की स्थिति पर ध्यान देने के बजाय आपस में चर्चा और मोबाइल फोन में व्यस्त नजर आते हैं।
अस्पताल आने वाले तीमारदारों का कहना है कि कई बार मरीज उपचार की प्रतीक्षा में पड़े रहते हैं और उन्हें समय पर आवश्यक सहायता नहीं मिल पाती। जब संबंधित चिकित्सकों को इस स्थिति की जानकारी होती है तो उन्हें स्वयं मरीजों की देखरेख करनी पड़ती है तथा उपचार संबंधी व्यवस्थाएं संभालनी पड़ती हैं। इससे डॉक्टरों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ जाता है।
मरीजों के परिजनों का आरोप है कि यदि प्रशिक्षु स्टाफ अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए तो आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में काफी सुधार हो सकता है। अस्पताल में भर्ती कई मरीजों और उनके तीमारदारों ने भी स्टाफ की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जानकारों का कहना है कि प्रशिक्षण का उद्देश्य भविष्य के स्वास्थ्य कर्मियों को जिम्मेदारी, अनुशासन और सेवा भावना का पाठ पढ़ाना होता है। ऐसे में यदि प्रशिक्षण के दौरान ही लापरवाही बरती जाती है तो इसका सीधा असर मरीजों की देखभाल और अस्पताल की व्यवस्था पर पड़ता है।
लोहिया अस्पताल में प्रशिक्षुओं की लापरवाही से मरीज परेशान, आपातकालीन कक्ष में भी नहीं निभा रहे जिम्मेदारी


