धंसे जोड़ पर लोहे की पट्टिका वेल्ड कर एनएचएआई ने निभाई खानापूरी
फर्रुखाबाद। इटावा-बरेली राजमार्ग पर स्थित 56 वर्ष पुराने पांचालघाट स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया सेतु के धंसे हुए जोड़ की देर रात मरम्मत तो कर दी गई, लेकिन मरम्मत के तरीके ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एनएचएआई की टीम ने पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर लोहे की मोटी पट्टिका रखकर उसे गार्डरों से वेल्ड कर दिया, जिसे स्थानीय लोग स्थायी समाधान के बजाय महज “जुगाड़ मरम्मत” और खानापूरी बता रहे हैं।
पिछले कई दिनों से पुल का जोड़ धंसने के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। सड़क के बीच बने गड्ढेनुमा हिस्से से गुजरते समय दोपहिया और चारपहिया वाहन झटकों के साथ निकल रहे थे, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद एनएचएआई हरकत में आया और देर रात मरम्मत कार्य शुरू कराया।
मरम्मत के दौरान कुछ समय के लिए यातायात रोका गया और धंसे हुए हिस्से पर लोहे की पट्टिका रखकर वेल्डिंग कर दी गई। हालांकि पुल की वास्तविक संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा को लेकर अभी भी सवाल बरकरार हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये के राजमार्ग पर इस तरह की अस्थायी मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्होंने पुल की तकनीकी जांच कराकर व्यापक मरम्मत और सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते पुल की गहन जांच और मजबूत मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल एनएचएआई की कार्रवाई से यातायात सुचारु हो गया है, लेकिन पुल की सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंताएं अभी भी खत्म नहीं हुई हैं।


