लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने प्रदेशभर में संचालित विद्यालयों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 70 जिलों के 465 विद्यालयों की मान्यता रद्द कर दी है। बोर्ड की इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग और निजी विद्यालय संचालकों में हड़कंप मच गया है। मान्यता रद्द किए गए विद्यालयों पर निर्धारित मानकों का पालन न करने, दस्तावेजों में अनियमितता तथा शैक्षणिक एवं भौतिक संसाधनों की कमी जैसे गंभीर आरोप पाए गए हैं।
यूपी बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित इन विद्यालयों की जांच के दौरान कई खामियां सामने आई थीं। विद्यालयों में पर्याप्त कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल मैदान और योग्य शिक्षकों की उपलब्धता जैसे मानकों का पालन नहीं किया गया था। कई संस्थानों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संचालन करने के आरोप भी सामने आए।
बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों से प्रदेशभर में विद्यालयों की व्यापक जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी क्रम में गठित टीमों ने विभिन्न जिलों में निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद 465 विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। मान्यता रद्द होने के बाद संबंधित विद्यालय अब यूपी बोर्ड से संबद्ध संस्थान के रूप में संचालित नहीं हो सकेंगे। साथ ही उनके नए प्रवेश और बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित अधिकार भी समाप्त हो जाएंगे।
शिक्षा विभाग ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें निकटवर्ती मान्यता प्राप्त विद्यालयों में समायोजित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में नियमों की अनदेखी करने वाले विद्यालयों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यूपी बोर्ड की इस बड़ी कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रदेशभर में 465 विद्यालयों की मान्यता रद्द होने के बाद अन्य संस्थानों में भी निर्धारित मानकों के पालन को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।


