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Sunday, July 26, 2026

35 सहकारी समितियों पर अटका 1,258 मीट्रिक टन गेहूं, खाद वितरण प्रभावित; पीसीएफ प्रबंधक व परिवहन ठेकेदार पर होगी कार्रवाई

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फर्रुखाबाद। जिले में किसानों से खरीदा गया गेहूं समय पर गोदामों तक नहीं पहुंच पाने से सहकारी समितियों पर गंभीर अव्यवस्था पैदा हो गई है। परिवहन व्यवस्था में लापरवाही और विभागीय समन्वय की कमी के चलते खरीद बंद हुए एक माह दस दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद 35 सहकारी समितियों से गेहूं का पूरा उठान नहीं हो सका है। इसका सीधा असर किसानों को मिलने वाली यूरिया और डीएपी खाद की उपलब्धता पर पड़ रहा है।
जनपद की 70 सहकारी समितियों में से 35 पर पीसीएफ (प्रांतीय सहकारी संघ) के गेहूं क्रय केंद्र संचालित किए गए थे। 15 जून तक चली खरीद प्रक्रिया के दौरान इन केंद्रों पर कुल 6,184.43 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। लेकिन खरीद पूरी होने के बाद भी परिवहन व्यवस्था सुचारु न होने के कारण 24 जुलाई तक 1,258 मीट्रिक टन गेहूं समितियों पर ही पड़ा रहा।
सूत्रों के अनुसार कई समितियों से अब तक एक बार भी गेहूं का उठान नहीं किया गया। इनमें सरैया बढ़पुर, खुदागंज, बराबिकू और हरसिंहपुर गहलवार प्रमुख हैं। इसके अलावा सातनपुर मंडी सहित कमालगंज, चिलसरा, राजेपुर गांधी, नीबकरोरी, कंपिल, कुबेरपुर कुतलूपुर, खिमसेपुर, गनीपुर जोगपुर गठवाया, जैनापुर, नया गांव हुसैनपुर हड़ाई, बरौन, महमदगंज परमनगर, विहार, शादनगर, राजेपुर एट, बरुआ, मंझना, सिरोली, अमृतपुर, कनासी, कायमगंज दक्षिणी, नगला बजीर, खारबंदी, नगला नान, पखना, पिथनापुर, पिपरगांव, मदनपुर, महलई, हरकमपुर तथा सहकारी संघ पखना जैसे कई केंद्रों पर भी गेहूं का उठान लंबित है।
समितियों के गोदामों में गेहूं भरे होने के कारण खाद रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचा है। इससे यूरिया और डीएपी लेने पहुंच रहे किसानों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। सहकारी समितियों से जुड़े हजारों किसानों के सामने खेती के लिए आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता का संकट खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार कई बी-पैक्स समितियों से पांच हजार से सात हजार तक किसान सदस्य जुड़े हुए हैं।
मामले में विभागीय अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। पीसीएफ के प्रभारी जिला प्रबंधक अरुण सिंह का कहना है कि एफसीआई गोदाम में आई दिक्कतों के कारण गेहूं उठान प्रभावित हुआ। वहीं एफसीआई अधिकारियों का आरोप है कि पीसीएफ के परिवहन ठेकेदार समय पर ट्रकों की व्यवस्था नहीं कर पाए, जिसके कारण उठान में लगातार देरी हुई।
डिप्टी आरएमओ रोली सिंह ने दोनों पक्षों की लापरवाही स्वीकार करते हुए बताया कि जुलाई के पहले सप्ताह में एफसीआई गोदाम पर भौतिक सत्यापन और बाद में कांटा खराब होने से गेहूं की आवक प्रभावित हुई। साथ ही पीसीएफ अधिकारियों और परिवहन ठेकेदार की सुस्ती ने भी समस्या को और बढ़ा दिया। उनका कहना है कि यदि नियमित रूप से गेहूं का उठान होता, तो समितियों पर इतनी मात्रा में अनाज जमा नहीं रहता।
उधर, एआर कोऑपरेटिव अजय पालीवाल ने बताया कि समितियों पर गेहूं को व्यवस्थित कर खाद रखने के लिए स्थान बनाया जा रहा है और यूरिया तथा डीएपी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही शेष गेहूं का उठान पूरा कर समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पीसीएफ के जिला प्रबंधक और परिवहन ठेकेदार की लापरवाही सामने आई है। उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेज दिया गया है तथा पीसीएफ के प्रबंध निदेशक (एमडी) को भी पूरे प्रकरण से अवगत करा दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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