34.2 C
Lucknow
Wednesday, July 22, 2026

सीजेपी आंदोलन के आगे सरकार नरम, दूसरी बार वार्ता का प्रस्ताव

Must read

 

दिल्ली में हाई अलर्ट, 16 मेट्रो स्टेशन बंद

नई दिल्ली। देशभर में चर्चा का केंद्र बने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। लगातार 33वें दिन जारी प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने दूसरी बार वार्ता का प्रस्ताव भेजा है। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि प्रस्ताव पर मुख्य समिति विचार करेगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर का आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

आंदोलन को देखते हुए राजधानी दिल्ली में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है। 16 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं और संसद भवन सहित संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी घेराबंदी कर दी गई है। पश्चिम बंगाल से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 20 अतिरिक्त टुकड़ियां (करीब दो हजार जवान) दिल्ली बुलाई गई हैं। पहले से तैनात सुरक्षा बलों के साथ राजधानी पूरी तरह सुरक्षा घेरे में है।

उधर, 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने 10 मुकदमे दर्ज किए हैं। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और दंगा नियंत्रण बल के जवानों पर हमला, पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं सीजेपी का कहना है कि मुकदमों से आंदोलन नहीं रुकेगा और जरूरत पड़ने पर देशभर से लाखों युवा दिल्ली पहुंचेंगे।

इस बीच सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी हलचल तेज है। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के अनुसार मंगलवार देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की।

जंतर-मंतर पर बुधवार सुबह से हजारों प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं। मंच पर संविधान की प्रति, चरखा, रामचरितमानस, बुद्ध प्रतिमा और सोनम वांगचुक का चित्र रखकर आंदोलन जारी है। देश के विभिन्न राज्यों से लोग भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री भेज रहे हैं। कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट), तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी आंदोलन स्थल पहुंचकर समर्थन जताया है।

अब पूरे देश की निगाहें सरकार और सीजेपी के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं। यदि बातचीत बेनतीजा रही तो संसद के मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक टकराव और आंदोलन दोनों के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article